उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के साथ रिश्तों को मिला नया मुकाम; अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध केवल आधुनिक कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती और साझा विरासत जुड़ी हुई है। उन्होंने उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर गर्व व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत सम्मान के बजाय भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोस्तलिक का अर्थ दोस्ती है और यही शब्द भारत तथा उज्बेकिस्तान के रिश्तों की वास्तविक भावना को सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त करता है।
पीएम मोदी ने सम्मान को स्वीकार करते हुए उज्बेकिस्तान की जनता सरकार और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों की ऐतिहासिक दोस्ती और साझा विरासत को समर्पित है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का नया स्तर दोनों देशों के लिए आर्थिक कूटनीतिक सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान की अहम भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति है और भारत के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ मजबूत संबंध लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के संबंधों को नई श्रेणी मिलना भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर भारत की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान के साथ अपनी मित्रता को हमेशा मजबूत बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपनी जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटेगा और दोनों देशों की दोस्ती को मजबूती से आगे बढ़ाता रहेगा।
पीएम मोदी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी को ग्लोबल साउथ के व्यापक हितों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज बनने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों का प्रयास होगा कि ग्लोबल साउथ के लोगों के कल्याण और पूरी मानवता के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम किया जाए।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सम्मान अपने साथ जिम्मेदारी लेकर आता है। उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक धरती से उन्होंने दोनों देशों की दोस्ती को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों का व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलना इसी निरंतर सहयोग का परिणाम है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक रणनीतिक जरूरतों से जोड़ते हुए यह साझेदारी आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
