August 30, 2026

महुआ और तेंदू पत्ते बेचने से इको-टूरिज्म तक का सफर, मैथिली भुए की कहानी ने जीता पीएम मोदी का ध्यान; 50 महिलाओं को ट्रेनिंग

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नई दिल्ली। ओडिशा के संबलपुर जिले के देबरीगढ़ की रहने वाली मैथिली भुए की मेहनत और हौसले को अब देशभर में पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 137वें एपिसोड में मैथिली भुए के काम का जिक्र करते हुए उनकी सराहना की। इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने जंगलों के संरक्षण में योगदान देने और स्थानीय महिलाओं को रोजगार से जोड़ने वाली मैथिली के लिए यह पल बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री की ओर से अपने काम की तारीफ किए जाने पर उन्होंने खुशी जाहिर की और इसे उनके जैसे ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा बताया।

मैथिली भुए की कहानी आसान नहीं रही है। वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं और लंबे समय तक जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर रही हैं। तेंदू के पत्ते बांस महुआ कराडी और जलाऊ लकड़ी जैसे वन उत्पादों को इकट्ठा कर उन्हें बेचकर वह अपने परिवार का गुजारा करती थीं। सीमित संसाधनों के बीच जीवन आगे बढ़ रहा था लेकिन 2023 में देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी को एक नई दिशा मिली।

इको-टूरिज्म ने न केवल मैथिली को रोजगार का नया जरिया दिया बल्कि उन्हें अपने आसपास की दूसरी महिलाओं के लिए भी अवसर पैदा करने की प्रेरणा दी। धीरे धीरे क्षेत्र की महिलाएं इस पहल से जुड़ने लगीं और अब मैथिली करीब 40 से 50 महिलाओं को इको-टूरिज्म तथा हॉस्पिटैलिटी से जुड़े अलग अलग कामों की ट्रेनिंग दे रही हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को नौकरी दिलाना नहीं बल्कि उन्हें इतना सक्षम बनाना है कि वे अपने दम पर बेहतर आजीविका हासिल कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

मैथिली के मार्गदर्शन में महिलाएं पर्यटकों के साथ व्यवहार करने उनकी जरूरतों को समझने और उन्हें बेहतर सेवाएं देने की ट्रेनिंग ले रही हैं। देबरीगढ़ में इको-टूरिज्म से जुड़े कई क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इनमें स्मारिका की दुकानें चाय की दुकानें रेस्तरां नेचर कैंप और होमस्टे जैसे काम शामिल हैं। महिलाओं को उनकी जिम्मेदारी और काम की प्रकृति के अनुसार अलग अलग प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे पर्यटकों को बेहतर अनुभव दे सकें।

मैथिली का मानना है कि पर्यटन के साथ स्थानीय समुदाय को जोड़ना क्षेत्र के विकास का मजबूत माध्यम बन सकता है। जब स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलता है तो उन्हें बेहतर आय का अवसर मिलता है और साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना भी मजबूत होती है। खास तौर पर महिलाओं के लिए इको-टूरिज्म आत्मनिर्भर बनने का प्रभावी रास्ता साबित हो सकता है।

मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नाम लिए जाने के बाद मैथिली की कहानी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों को पहचान मिलना बेहद खुशी की बात है। मैथिली चाहती हैं कि आने वाले समय में और अधिक महिलाएं इको-टूरिज्म से जुड़ें और अपनी आजीविका का मजबूत आधार तैयार करें।

उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। स्थानीय अवसरों की पहचान मेहनत और दूसरों को साथ लेकर आगे बढ़ने की इच्छा किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है। जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर रहने वाली मैथिली भुए आज उसी प्राकृतिक विरासत को बचाने और उसके जरिए महिलाओं को रोजगार देने की मुहिम का हिस्सा बन चुकी हैं। मन की बात में मिली पहचान उनके इस सफर को नई ऊर्जा देने के साथ देबरीगढ़ के इको-टूरिज्म मॉडल को भी देश के सामने एक प्रेरक उदाहरण के रूप में पेश करती है।

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