कोच के दस्तावेजों पर IDA का स्विमिंग पूल टेंडर? बिना अनुमति इस्तेमाल का आरोप, संस्था ने कहा- आरोप बेबुनियाद
मुकुंद मोहन शर्मा के अनुसार वह वर्ष 2022 में अपने छात्र संदीप तोकस के माध्यम से देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट से जुड़े थे। इसके बाद 21 फरवरी 2023 को उन्होंने संस्था के डायरेक्टर देवेंद्र लांबा और उनकी पत्नी मधुलिका को अपने शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता से जुड़े दस्तावेज दिए थे। उनका कहना है कि ये दस्तावेज केवल नई दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के स्विमिंग पूल संचालन के टेंडर में इस्तेमाल करने के लिए दिए गए थे। बाद में वह टेंडर निरस्त हो गया।
कोच का आरोप है कि टेंडर निरस्त होने के बाद उन्होंने अपने दस्तावेजों को किसी अन्य सरकारी अर्धसरकारी या निजी संस्था की टेंडर प्रक्रिया में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर में IDA के स्विमिंग पूल संचालन का ठेका हासिल करने में किया गया। शर्मा के मुताबिक 8 सितंबर 2023 को IDA का अनुबंध हासिल किया गया था। उनका दावा है कि पूरी प्रक्रिया में उनसे किसी तरह की लिखित अनुमति या सहमति नहीं ली गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शर्मा को कथित दस्तावेज दुरुपयोग की जानकारी करीब तीन साल बाद जनवरी 2026 में मिली। एक परिचित के माध्यम से उन्हें पता चला कि उनके दस्तावेज इंदौर के IDA टेंडर में लगाए गए हैं। इसके बाद उन्होंने IDA के CEO को ईमेल के जरिए शिकायत की। 25 फरवरी को उन्होंने मामले की जानकारी देते हुए ईमेल भेजा और 7 मार्च को रिमाइंडर भी भेजा। कई महीने तक स्पष्ट कार्रवाई या जांच की जानकारी नहीं मिलने के बाद उन्होंने लिखित शिकायत के साथ शपथपत्र भी दिया।
शर्मा ने यह भी आशंका जताई है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य शहरों में स्विमिंग पूल के टेंडर लाइसेंस या परमिट हासिल करने के लिए भी किया गया हो सकता है। उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के लखनऊ स्थित रीजनल सेंटर के स्विमिंग पूल से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में भी अपने दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की है।
हालांकि देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट के संचालक देवेंद्र लांबा ने शर्मा के आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। उनका कहना है कि शर्मा पहले उनके संस्थान से जुड़े थे और उनकी शैक्षणिक योग्यता तथा उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज संस्था के रिकॉर्ड में उपलब्ध थे। लांबा के मुताबिक किसी कोच या कर्मचारी के संस्थान से जुड़ने पर उसकी योग्यता और उपलब्धियों के दस्तावेज रिकॉर्ड में रखना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि क्राइम ब्रांच की शिकायत के बाद संस्था अपना जवाब दे चुकी है और जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज और अंडरटेकिंग भी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई जाएगी।
लांबा ने यह भी कहा कि देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हेड ऑफिस गुरुग्राम में है और देश के अलग-अलग हिस्सों में उसके कई सेंटर संचालित होते हैं। उनके मुताबिक टेंडर प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि हेड ऑफिस के माध्यम से की जाती है।
वहीं IDA के CEO डॉ. परीक्षित झाडे ने बताया कि मुकुंद मोहन शर्मा की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है और विभागीय स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला आरोप और जांच के स्तर पर है और क्राइम ब्रांच की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेजों का वास्तव में किस तरह इस्तेमाल हुआ और टेंडर प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।
