August 24, 2026

इंदौर की लकड़ी मंडी में बड़ा खेल! शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, राज्य स्तरीय टीम ने पकड़े बिना टीपी और फर्जी दस्तावेज वाले वाहन

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इंदौर । इंदौर के धार रोड स्थित जीएनटी टिम्बर मार्केट में अवैध वनोपज के कारोबार को लेकर वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब तीन महीने पहले ही विभाग के अधिकारियों को शिकायत मिली थी कि मार्केट और आसपास के इलाकों में बिना ट्रांजिट परमिट यानी टीपी के लकड़ी और अन्य वनोपज लाई जा रही है। शिकायतों को गंभीर मानते हुए इंदौर डीएफओ ने सात रात्रि गश्ती दल भी गठित किए थे। इन दलों को अलग-अलग दिनों में जीएनटी मार्केट और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी कर अवैध परिवहन रोकने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई और आखिरकार राज्य स्तरीय उड़न दस्ते को इंदौर आकर कार्रवाई करनी पड़ी।

वन विभाग की ओर से 15 मई को जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया था कि सीएम हेल्पलाइन फोन और अन्य माध्यमों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि जीएनटी मार्केट में बिना टीपी अवैध वनोपज लाई जा रही है और उसका कारोबार किया जा रहा है। इसके बाद सात टीमों को रात में गश्त करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि बिना वैध दस्तावेज के कोई वनोपज इंदौर में प्रवेश न कर सके। प्रत्येक टीम को सप्ताह में एक दिन रात्रि गश्त करनी थी। यानी विभाग को शिकायत की जानकारी भी थी और निगरानी के लिए बाकायदा व्यवस्था भी बनाई गई थी लेकिन अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग सका।

मामला राज्य स्तर तक पहुंचने के बाद भोपाल से राज्य स्तरीय उड़न दस्ता इंदौर पहुंचा। टीम ने धार रोड स्थित जीएनटी टिम्बर मार्केट में कार्रवाई करते हुए बबूल की लकड़ी से भरे दो वाहनों को पकड़ा। जांच के दौरान एक वाहन का चालक लकड़ी के परिवहन से संबंधित टीपी पेश नहीं कर सका। दूसरे वाहन में महाराष्ट्र के जलगांव की टीपी दिखाई गई लेकिन जांच में उसे फर्जी पाया गया। टीम ने दस्तावेज को स्कैन कर तैयार की गई फर्जी टीपी बताया। दोनों वाहनों को जब्त कर वन विभाग के नवरत्न बाग स्थित कार्यालय भेज दिया गया।

इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय वन अमले को पहले से शामिल नहीं किया गया था। राज्य स्तरीय टीम के साथ उज्जैन और देवास के वन कर्मचारी भी मौजूद रहे। टीम ने जीएनटी मार्केट की जालाराम इंटरप्राइजेस की आरा मशीन की भी जांच की। करीब दो घंटे तक दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगालने के बाद मशीन को सील कर दिया गया।

प्रारंभिक जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि अलग-अलग राज्यों की टीपी का इस्तेमाल कर मध्यप्रदेश की लकड़ी को दूसरे राज्यों से लाई गई वनोपज के रूप में दिखाया जा रहा हो सकता है। महाराष्ट्र तेलंगाना गुजरात राजस्थान और उत्तर प्रदेश की टीपी के जरिए लकड़ी के परिवहन की शिकायतें जांच के दायरे में हैं। यह भी आरोप सामने आते रहे हैं कि एक ही टीपी के आधार पर अलग-अलग वाहनों में लकड़ी भेजी जाती है।

जीएनटी मार्केट में बिना सील हैमर के लकड़ी से भरे वाहनों के पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। आरोप है कि ऐसी लकड़ी को आरा मशीनों में चीरकर गुटके और फाचरे तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें इंदौर की नगरीय सीमा से बाहर भेज दिया जाता है। अब राज्य स्तरीय टीम इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

डीएफओ इंदौर लालसुधाकर सिंह के मुताबिक बिना वैध दस्तावेज के वनोपज का परिवहन अवैध माना जाता है और ऐसे मामलों में वाहन तथा संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विभाग को तीन महीने पहले ही अवैध कारोबार की सूचना मिल चुकी थी और सात गश्ती दल निगरानी में लगाए गए थे तो राज्य स्तरीय टीम की कार्रवाई से पहले स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। जांच आगे बढ़ने के साथ इस सवाल का जवाब भी सामने आने की उम्मीद है।

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