टैरिफ दबाव के बीच जयशंकर का रूस दौरा अहम, लावरोव से मुलाकात में तेल व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा संभव
जयशंकर व्यापार, विज्ञान, तकनीक और संस्कृति से जुड़े भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में चल रही साझेदारी की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।
जयशंकर का रूस दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से तेल, गैस और यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी के बीच हो रहा है। ऐसे में भारत-रूस ऊर्जा कारोबार इस यात्रा के महत्वपूर्ण संदर्भों में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और रूस पिछले कुछ समय में उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है।
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की पाबंदियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलाव के बीच भारत ने रूसी तेल की खरीद जारी रखी थी। हालांकि अमेरिकी दबाव और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच रूसी तेल आयात में बदलाव की स्थिति बनी रही। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और भारत के लिए रूसी तेल का महत्व फिर बढ़ गया।
जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक पहुंचने की बात सामने आई। यह आंकड़ा बताता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूसी आपूर्ति कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत को विशेष महत्व मिल सकता है।
दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रक्षा और सैन्य तकनीकी सहयोग है। भारत और रूस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में साझेदार रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों के अंतर-सरकारी आयोग के सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग से जुड़े कार्य समूह की बैठक भी हुई थी। इसमें दोनों पक्षों ने सशस्त्र बलों के बीच सहयोग बढ़ाने और आगामी गतिविधियों की योजना पर चर्चा की थी।
इस पृष्ठभूमि में जयशंकर की रूस यात्रा दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, तकनीकी सहयोग और सैन्य साझेदारी से जुड़े विषय भी द्विपक्षीय बातचीत के एजेंडे में रह सकते हैं, हालांकि किसी विशेष नई रक्षा डील की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
भारत और रूस के संबंध केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश व्यापार, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अंतर-सरकारी आयोग की बैठक इसी व्यापक सहयोग को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है।
रूसी नेतृत्व भी हाल के समय में भारत के आर्थिक और तकनीकी विकास की सराहना करता रहा है। ऐसे में जयशंकर की यात्रा को दोनों देशों के बीच पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। अमेरिकी टैरिफ दबाव, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत के लिए रूस के साथ संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
