August 22, 2026

1973 में आई द एक्सॉर्सिस्ट ने हॉरर सिनेमा को बदल दिया, नौ ऑस्कर नामांकन में दो जीत और आज भी 8.1 IMDb रेटिंग

0
8-1787390355
नई दिल्ली । हॉलीवुड की हॉरर फिल्मों की दुनिया में कुछ ऐसी फिल्में हैं, जिनका प्रभाव रिलीज के कई दशक बाद भी कायम है। द एक्सॉर्सिस्ट ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। विलियम फ्राइडकिन के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1973 में रिलीज हुई थी और उस दौर में दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बनी। फिल्म की कहानी, डरावने दृश्य और धार्मिक पृष्ठभूमि ने इसे सामान्य हॉरर फिल्मों से अलग पहचान दिलाई।

द एक्सॉर्सिस्ट की कहानी 12 साल की लड़की रेगन के इर्द-गिर्द घूमती है। रेगन अपनी मां के साथ रहती है और एक बोर्ड के जरिए कथित तौर पर आत्माओं से संपर्क करने की कोशिश करती है। इसके बाद उसके व्यवहार और व्यक्तित्व में खतरनाक बदलाव दिखाई देने लगते हैं। मां अपनी बेटी की हालत को समझने और उसका इलाज कराने की कोशिश करती है, लेकिन परिस्थितियां लगातार भयावह होती जाती हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ फिल्म में धार्मिक विश्वास, डर और अलौकिक शक्तियों के बीच संघर्ष देखने को मिलता है।

फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में उसका ऑस्कर प्रदर्शन शामिल है। द एक्सॉर्सिस्ट को अकादमी पुरस्कारों की नौ श्रेणियों में नामांकन मिला था। हॉरर शैली की किसी फिल्म के लिए इतने बड़े स्तर पर ऑस्कर मान्यता मिलना उस समय बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई। फिल्म ने दो पुरस्कार अपने नाम किए। उसे सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित पटकथा और सर्वश्रेष्ठ ध्वनि के लिए ऑस्कर मिला था। इस उपलब्धि ने हॉरर फिल्मों को केवल मनोरंजन तक सीमित मानने वाली धारणा को भी चुनौती दी।

फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा आज भी उसकी IMDb रेटिंग से लगाया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार द एक्सॉर्सिस्ट को 8.1 की IMDb रेटिंग मिली हुई है। पांच दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी इतनी मजबूत रेटिंग फिल्म की स्थायी लोकप्रियता को दर्शाती है। फिल्म को हॉरर सिनेमा के इतिहास में एक प्रभावशाली कृति के तौर पर देखा जाता है।

फिल्म से जुड़ी एक दिलचस्प बात अभिनेत्री लिंडा ब्लेयर से भी संबंधित है। उन्होंने रेगन का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके किरदार के भयावह बदलाव और अभिनय ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। रिलीज के बाद उन्हें धमकियों का सामना भी करना पड़ा था। धार्मिक आधार पर फिल्म की विषयवस्तु को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इसमें शैतान से जुड़े तत्वों को अनुचित तरीके से प्रस्तुत किया गया है। स्थिति को देखते हुए फिल्म के वितरण से जुड़े लोगों ने उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की थी।

द एक्सॉर्सिस्ट की खासियत केवल उसके डरावने दृश्यों में नहीं थी, बल्कि इसकी कहानी और वातावरण ने दर्शकों के मन में लंबे समय तक असर छोड़ा। फिल्म ने यह साबित किया कि हॉरर सिनेमा भी गंभीर विषयों, मजबूत पटकथा और प्रभावशाली अभिनय के जरिए बड़े पुरस्कारों तक पहुंच सकता है।

आज के दौर में हॉरर फिल्मों में आधुनिक तकनीक, विशेष प्रभाव और बड़े बजट का इस्तेमाल आम हो चुका है, लेकिन द एक्सॉर्सिस्ट की चर्चा अब भी बनी हुई है। फिल्म की विरासत को उसके पुरस्कारों, आलोचनात्मक सम्मान और दर्शकों की प्रतिक्रिया से समझा जा सकता है। पांच दशक बाद भी यह फिल्म उन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, जो हॉरर सिनेमा के इतिहास की चर्चित फिल्मों को देखना चाहते हैं। भारतीय दर्शक भी इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता के अनुसार रेंट पर देख सकते हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *