August 22, 2026

दीया मिर्जा ने बताया क्यों 20 साल से फिल्म सेट पर आईना और मॉनिटर देखने से जानबूझकर रहती हैं दूर

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नई दिल्ली ।अभिनेत्री दीया मिर्जा ने अपने फिल्मी करियर से जुड़ी एक ऐसी आदत के बारे में बताया है, जो लंबे समय से उनकी कार्यशैली का हिस्सा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वह करीब 20 वर्षों से फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर अपना चेहरा आईने में नहीं देखतीं। इतना ही नहीं, वह शॉट पूरा होने के बाद मॉनिटर पर अपनी परफॉर्मेंस और लुक को चेक करने की आदत से भी दूर रहती हैं।

दीया के मुताबिक, उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में ही महसूस कर लिया था कि शूटिंग के दौरान अपने लुक पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देना उनके लिए सही नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने लिए ऐसी कार्यशैली विकसित की, जिसमें कैमरे के सामने अपनी उपस्थिति देखने के बजाय किरदार और उस पल की भावनाओं को समझने पर अधिक ध्यान दिया जाए।

अभिनेत्री का मानना है कि किसी कलाकार के लिए सिर्फ यह देखना महत्वपूर्ण नहीं होना चाहिए कि वह कैमरे पर कैसा दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, अभिनय करते समय दृश्य की भावना, किरदार की स्थिति और कहानी के उस खास पल को समझना अधिक जरूरी है। इसी सोच के कारण वह शॉट के बाद मॉनिटर देखने से भी बचती हैं।

दीया ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म में कलाकार की दृश्य पहचान को लेकर वह लापरवाह नहीं रहतीं। बाल, मेकअप, कपड़े और दूसरे लुक से जुड़े पहलुओं को फिल्म निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं। उनके अनुसार, किसी किरदार की दृश्य पहचान पहले से सोच-समझकर तैयार की जाती है और वह उस पूरी प्रक्रिया का सम्मान करती हैं।

अभिनेत्री को अपने किरदार के कपड़ों और उनकी तैयारी में विशेष रुचि रहती है। वह इस बात पर ध्यान देती हैं कि किरदार के लिए किस तरह के कपड़े चुने गए हैं, उनका कपड़ा या फैब्रिक कैसा है और उनकी बनावट तथा रंग किस तरह किरदार की पहचान से मेल खाते हैं। हालांकि, एक बार यह तैयारी पूरी हो जाने के बाद वह अपने चेहरे और लुक को लेकर लगातार निगरानी रखने के बजाय अभिनय की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करती हैं।

दीया का कहना है कि अपने रूप-रंग को लेकर लगातार चिंता करने से कलाकार का मानसिक ध्यान प्रभावित हो सकता है। उनका मानना है कि दिखावे को लेकर जरूरत से ज्यादा सजग रहने की एक कीमत होती है और वह अपनी मानसिक शांति को उस कीमत के रूप में खर्च नहीं करना चाहतीं। उनके लिए शूटिंग के दौरान सहज रहना और किरदार में पूरी तरह शामिल होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

दीया मिर्जा ने अपनी इस सोच को युवा लड़कियों के संदर्भ में भी जोड़ा। उनका कहना है कि महिलाओं और खासकर युवा लड़कियों पर अपने रूप-रंग को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता है। उन्हें कई बार यह महसूस कराया जाता है कि उनका वर्तमान रूप पर्याप्त अच्छा नहीं है और उन्हें किसी तरह के कॉस्मेटिक बदलाव की जरूरत है।

अभिनेत्री चाहती हैं कि उनकी सोच युवा महिलाओं को अपने शरीर और रूप-रंग के साथ बेहतर और स्वस्थ रिश्ता बनाने के लिए प्रेरित करे। उनका संदेश है कि किसी व्यक्ति का आत्मविश्वास केवल उसके बाहरी रूप पर निर्भर नहीं होना चाहिए। दीया की यह कार्यशैली उनके लंबे अभिनय अनुभव और कैमरे के सामने अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण को दर्शाती है।

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