August 22, 2026

देहरादून में अब रात 10 बजे बाद नहीं घूम सकेंगे… पुलिस का रहेगा पहरा

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Uk-Crime
  • बाहर निकले तो जाना पड़ेगा जेल

देहरादून। पटेलनगर के इंडस्ट्रियल क्षेत्र में निजी विश्वविद्यालय के बाहर हुई फायरिंग की घटना के बाद अब देर रात बेवजह घूमने वाले छात्रों और युवाओं पर पुलिस का शिकंजा कसने जा रहा है। पढ़ाई की आड़ में देर रात तक सड़कों पर घूमने, हुड़दंग या आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने वालों की पहचान कर पुलिस कार्रवाई करेगी।

छात्रों और युवाओं पर पुलिस का शिकंजा
इसी क्रम में गुरुवार देर रात एसपी सिटी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने प्रेमनगर क्षेत्र के पीजी व हास्टलों में छापेमारी जैसी चेकिंग की। चार हास्टलों में अनियमितताएं मिलीं, जबकि देर रात अनावश्यक रूप से घूम रहे चार संदिग्ध युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

फायरिंग की घटना ने पुलिस को छात्र बाहुल्य क्षेत्रों में रात की गतिविधियों पर नए सिरे से निगरानी के लिए मजबूर किया है। पुलिस अब सिर्फ किसी घटना के बाद आरोपित तलाशने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घटना से पहले संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की रणनीति पर काम करेगी।

हास्टल-पीजी में सीसीटीवी कैमरे लगाने के भी निर्देश
एसपी सिटी ने पीजी और हास्टल संचालकों को निर्देश दिए कि उनके यहां रहने वाले छात्र-छात्राओं के प्रवेश की समयसीमा रात 10 बजे निर्धारित की जाए। बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को सत्यापन के बाद ही प्रवेश दिया जाए और आने-जाने वालों का पूरा विवरण सुरक्षित रखा जाए। सभी छात्रों का शत-प्रतिशत सत्यापन कराने और हास्टल-पीजी में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस ने साफ कर दिया है कि छात्र के अपराध में शामिल पाए जाने पर कार्रवाई केवल छात्र तक सीमित नहीं रहेगी। हास्टल या पीजी में नशीले पदार्थों के सेवन की शिकायत, आपराधिक गतिविधि या रात में अनावश्यक घूमने की स्थिति में संबंधित छात्र के साथ प्रतिष्ठान संचालक की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

चार हास्टल संचालकों को नोटिस
अचानक हुई चेकिंग में चार हास्टल में अनियमितताएं मिलीं। पुलिस ने संबंधित संचालकों को नोटिस जारी कर निर्धारित समयसीमा में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। वहीं, देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे चार युवकों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया।

एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने पढ़ाई की आड़ में हुड़दंग व आपराधिक गतिविधियों में लिप्त छात्र-छात्राओं को चिह्नित कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। फायरिंग की घटना के बाद पुलिस का यह अभियान साफ संकेत है कि छात्र क्षेत्रों में रात की मनमानी अब आसानी से नहीं चलेगी।

एक ओर जहां कई जानकारों का मानना है किद उत्तराखंड में गुंडों का आतंक न केवल यहां के लोगों को डरा रहा है। बल्कि अब तो सरकार से लेकर प्रशासन में भी इसका खौफ साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। इसी के चलते जहां शासन प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए वहीं ये अब लोगों को घरों में कैद होने के लिए कहते दिख रहे हैं। तभी तो एक ओर जहां देश दुनिया में जगह जगह लोगों को देर रात तक शहर में घुमने के लिए कई तरह से प्रयास किए जा रहे हैं वहीं पर्यटन से मुख्य आय कमाने वाली देवभूमि में रात को घूमने पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

सवाल तो उठता है:
एक ओर जहां मध्यप्रदेश में अपने समय पर क्राइम के लिए चर्चित इंदौर शहर के कुछ क्षेत्र सरकार की कोशिशों व प्रशासन की चुस्ती के चलते, आज 24 घंटों के लिए खुले रहते हैं। वहीं उत्तराखंड सरकार व प्रशासन की नाकामी के चलते देहरादून में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने व लोगों को सुरक्षा देने की बजाय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए लोगों पर ही बैन लगाता दिख रहा है। यह कदम काफी हद तक विभागों की मजबूत इच्छाशक्ति और कार्यप्रणाली पर प्रश्न तो उठाता ही है, साथ ही सरकार की कमजोर व्यवस्था को भी दिखाता है।

 

 

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