August 17, 2026

सोमवार व्रत में न करें ये गलतियां, जलाभिषेक से लेकर शिव आरती तक जानें पूरी पूजा विधि

0
12-23-1770899734

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दिन रखा जाने वाला व्रत महादेव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार व्रत श्रद्धा और नियम के साथ करने से मन को शांति मिलती है और भक्त भगवान शिव की कृपा की कामना करता है। सोमवार व्रत के कई प्रकार बताए गए हैं इसलिए इसकी विधि और भोजन के नियम व्रत के प्रकार के अनुसार अलग हो सकते हैं। सामान्य सोमवार व्रत में सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है। इसके बाद घर के पूजा स्थल या शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का पूजन किया जाता है।

पूजा की शुरुआत शिवलिंग पर जल अर्पित करने से की जा सकती है। धार्मिक परंपरा में दूध और पंचामृत से अभिषेक करने के बाद भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा सामग्री में गंगाजल दूध दही शहद घी बेलपत्र चंदन फूल फल धूप और दीप जैसी सामग्री रखी जा सकती है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं। सावन सोमवार की पूजा में भी जलाभिषेक और शिव पूजन को प्रमुख माना गया है।

अभिषेक के बाद भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते समय श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखना चाहिए। इसके बाद शिव मंत्र का जाप किया जा सकता है। ॐ नमः शिवाय सबसे सरल और प्रचलित शिव मंत्रों में से एक है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र या शिव स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं। पूजा के दौरान माता पार्वती और नंदी का ध्यान करना भी परंपरा का हिस्सा माना जाता है। इसके बाद भगवान शिव को नैवेद्य अर्पित करके धूप और दीप से आरती की जाती है।

सोमवार व्रत में भोजन को लेकर भी अलग-अलग परंपराएं हैं। कुछ श्रद्धालु पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कई लोग फलाहार करते हैं। कुछ व्रतों में दिन में एक समय फलाहार का नियम बताया गया है जबकि सावन के कुछ सोमवार व्रतों में सूर्यास्त के बाद भोजन करने की परंपरा मिलती है। इसलिए अपनी शारीरिक क्षमता और व्रत के प्रकार के अनुसार आहार का नियम अपनाना उचित माना जाता है।

पूजा के बाद सोमवार व्रत की कथा सुनना या पढ़ना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा श्रवण से व्रत की पूजा पूर्ण मानी जाती है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती से परिवार की सुख शांति स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। शाम के समय दोबारा भगवान शिव का स्मरण करके दीप जलाना और आरती करना भी शुभ माना जाता है।

सोमवार व्रत रखते समय सबसे जरूरी बात श्रद्धा के साथ संयम और सकारात्मक भाव बनाए रखना है। पूजा में दिखावे से अधिक महत्व मन की शुद्धता को दिया जाता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को कठिन या निर्जला उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इस तरह सोमवार व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है बल्कि यह भगवान शिव के प्रति आस्था ध्यान संयम और आत्मिक अनुशासन से जुड़ी धार्मिक परंपरा है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *