सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर, नाग पंचमी के साथ खास संयोग; ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक
इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग भगवान शिव से जुड़े हुए हैं और शिवजी के गले में नाग के विराजमान होने के कारण नाग पंचमी की पूजा का संबंध शिव आराधना से भी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं और बेलपत्र पुष्प अक्षत तथा अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री चढ़ा सकते हैं। नाग देवता की प्रतिमा या शिवलिंग के साथ स्थापित नाग प्रतिमा की भी पूजा की जा सकती है।
17 अगस्त को शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए अलग अलग पंचांगों में समय में थोड़ा अंतर मिल सकता है। आपके दिए गए पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 24 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त बताया गया है। सुबह 9 बजकर 8 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक शुभ उत्तम मुहूर्त रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और शहर के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर संभव है इसलिए पूजा के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा। नाग पंचमी के लिए भी अलग पंचांगों में सुबह के मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर दिया गया है।
सावन सोमवार की पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। श्रद्धा के अनुसार दूध और पंचामृत से अभिषेक भी किया जा सकता है। भगवान शिव को बेलपत्र पुष्प और फल अर्पित करें तथा धूप और दीप जलाकर पूजा करें। इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना और शिव आरती करना धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या जलाहार कर सकते हैं। कई परंपराओं में सावन सोमवार के व्रत में अनाज और सामान्य नमक से परहेज किया जाता है। हालांकि व्रत के नियम परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों को कठिन या निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
इस दिन नाग पंचमी होने के कारण नाग देवता की प्रतिमा पर भी जल पुष्प और पूजा सामग्री अर्पित की जा सकती है। जीवित सांपों को पकड़कर पूजा करने या उन्हें जबरन दूध पिलाने से बचना चाहिए। धार्मिक आस्था का पालन करते हुए नाग देवता की प्रतिमा का पूजन करना अधिक सुरक्षित तरीका है।
इस तरह 17 अगस्त का दिन शिव भक्तों के लिए धार्मिक रूप से विशेष माना जा रहा है। सावन सोमवार और नाग पंचमी का यह मेल श्रद्धालुओं को एक ही दिन भगवान शिव और नाग देवता की आराधना का अवसर देगा। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा संयम और सकारात्मक भाव माना जाता है। ज्योतिष से जुड़े शुभ प्रभावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए क्योंकि इनके प्रभावों का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
