नाग पंचमी 2026 की तारीख को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, 17 अगस्त को करें पूजा; जानें तिथि से लेकर जरूरी नियम तक
नाग पंचमी की पूजा के लिए 17 अगस्त को सुबह 5 बजकर 51 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। यह मुहूर्त नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार है और दूसरे शहरों में सूर्योदय तथा स्थानीय पंचांग के आधार पर समय में अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी दूसरे शहर में रहते हैं तो स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना बेहतर रहेगा।
नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव तथा नाग देवता का ध्यान करके पूजा का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें। नाग देवता की प्रतिमा पर भी जल अर्पित करके चंदन अक्षत और पुष्प चढ़ाए जा सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें और दीपक जलाकर आरती करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव और नाग देवता से सुख शांति और परिवार की मंगलकामना की जाती है।
कई स्थानों पर नाग पंचमी के दिन नाग देवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित करने की परंपरा भी है। हालांकि जीवित सांपों को पकड़कर उन्हें दूध पिलाना या उनके मुंह को दूध में डुबोना उचित नहीं है। सांप सामान्य रूप से दूध पीने वाले जीव नहीं होते और जबरदस्ती दूध पिलाने से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए नाग देवता की प्रतिमा का पूजन करना अधिक सुरक्षित और उचित तरीका है। नाग पंचमी की परंपराएं भी सांपों और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती हैं।
नाग पंचमी को लेकर धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भय दूर होता है और परिवार में सुख समृद्धि आती है। कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में नाग पूजा को राहु केतु और कालसर्प दोष से जुड़े उपायों के साथ भी जोड़ा जाता है। हालांकि कालसर्प दोष और उससे जुड़े उपाय ज्योतिषीय मान्यताओं का विषय हैं और इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अलग अलग ज्योतिषीय परंपराओं में इसके प्रभाव और उपायों को लेकर मतभेद भी पाए जाते हैं।
नाग पंचमी से जुड़ी धार्मिक कथाओं में राजा जनमेजय और आस्तिक मुनि का प्रसंग भी प्रमुख माना जाता है। मान्यता है कि राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की मृत्यु के बाद नागों के विनाश के लिए नाग यज्ञ कराया था। इसी दौरान आस्तिक मुनि ने यज्ञ को रोककर नागों की रक्षा की। इस कथा को नाग पंचमी की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है और इसके माध्यम से जीवों के प्रति दया तथा संरक्षण का संदेश भी मिलता है।
इस तरह 17 अगस्त को नाग पंचमी के अवसर पर भगवान शिव और नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है। इस बार सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक ही दिन पड़ना भक्तों के लिए धार्मिक दृष्टि से विशेष अवसर माना जा रहा है। पूजा में आस्था के साथ स्वच्छता और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का ध्यान रखना भी जरूरी है।
