August 9, 2026

कम उम्र में भी बढ़ रहा ब्लड क्लॉट का खतरा, पानी की कमी से लेकर मोटापा-धूम्रपान तक हो सकते हैं कारण; ऐसे रखें खून को स्वस्थ

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नई दिल्ली । खून हमारे शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने का काम करता है लेकिन जब रक्त का प्रवाह सामान्य से प्रभावित होने लगे या खून में थक्का बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आम बोलचाल में इसे खून गाढ़ा होना कहा जाता है। मेडिकल तौर पर कुछ स्थितियों में इसे हाइपरकोएगुलेबिलिटी या हाइपरविस्कॉसिटी से जोड़ा जाता है। हालांकि हर बार खून गाढ़ा होने का मतलब एक ही बीमारी नहीं होता और इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी खून के तरल हिस्से को कम कर सकती है। इससे रक्त अधिक कंसंट्रेटेड दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या असामान्य रूप से बढ़ने पर भी रक्त अधिक गाढ़ा हो सकता है। एरिथ्रोसाइटोसिस जैसी स्थितियां इसके उदाहरण हैं। लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और धूम्रपान भी ब्लड क्लॉट बनने के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।

कुछ परिस्थितियों में शरीर में खून के थक्के बनने की संभावना सामान्य से अधिक हो सकती है। सर्जरी के बाद लंबे समय तक आराम करना, गंभीर चोट, लंबी यात्रा या लगातार कई घंटे बैठे रहना ऐसे कारण हैं जिनमें विशेष सावधानी की जरूरत होती है। गर्भावस्था और प्रसव के आसपास का समय तथा कुछ हार्मोनल दवाएं भी कुछ लोगों में क्लॉटिंग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा कुछ आनुवंशिक स्थितियों के कारण भी किसी व्यक्ति में ब्लड क्लॉट बनने की संभावना अधिक हो सकती है।

खून में थक्का बनने की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वह शरीर की नस या धमनी में रक्त के सामान्य प्रवाह को रोक सकता है। अगर पैर की किसी गहरी नस में थक्का बनता है तो इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी डीवीटी कहा जाता है। इसमें आमतौर पर पैर में सूजन, दर्द या असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। स्थिति तब गंभीर हो सकती है जब यह थक्का टूटकर रक्त के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाए। ऐसा होने पर पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।

इसी तरह यदि कोई थक्का मस्तिष्क तक जाने वाली रक्त वाहिका में रक्त प्रवाह को बाधित करता है तो स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। इसलिए शरीर में अचानक दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पैर में अचानक सूजन या दर्द, सांस लेने में अचानक परेशानी, सीने में दर्द या स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

ब्लड क्लॉट का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं माना जाता। लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोगों, बहुत कम शारीरिक गतिविधि करने वालों, मोटापे से जूझ रहे लोगों और धूम्रपान करने वालों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। लंबी यात्रा करने वाले लोगों को भी लगातार कई घंटे एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचना चाहिए। जिन लोगों में पहले ब्लड क्लॉट की समस्या हो चुकी है या परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास रहा है उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

बचाव के लिए सबसे जरूरी बात लंबे समय तक लगातार निष्क्रिय रहने से बचना है। यदि आपका काम कई घंटे बैठकर करने वाला है तो बीच-बीच में उठकर कुछ देर चलना और पैरों को सक्रिय रखना फायदेमंद हो सकता है। लंबी यात्रा के दौरान भी समय-समय पर चलने-फिरने की कोशिश करनी चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने और शरीर में रक्त संचार को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।

इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूम्रपान से दूरी बनाना और वजन को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति का खून गाढ़ा है या नहीं। ऐसी स्थिति का कारण जानने के लिए डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के ब्लड थिनर या कोई अन्य दवा लेना उचित नहीं है। अगर आपको ब्लड क्लॉट के लक्षण दिखाई दें या किसी कारण से इसका जोखिम अधिक हो तो समय पर डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

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