जंतर-मंतर प्रदर्शन में भोजन व्यवस्था संभालने वाले जुनैद की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, परिवार को परेशान करने का लगाया आरोप
याचिका के अनुसार, जुनैद का आरोप है कि पुलिस उन्हें दिल्ली से अपने साथ ले गई और कई घंटे तक अपने कब्जे में रखने के बाद हरिद्वार के पास छोड़ दिया। उनका कहना है कि इस दौरान उन्हें कथित रूप से धमकाया भी गया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस पूरी घटना के कारण वे मानसिक दबाव में हैं और उन्हें अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
जुनैद ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस की कार्रवाई केवल उनके तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार, उनके पिता से पूछताछ की गई और उनकी बहन के ससुराल पक्ष के लोगों को भी अनावश्यक रूप से परेशान किया गया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराई जाए और उनके परिवार को किसी भी प्रकार के कथित उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान की जाए।
मोहम्मद जुनैद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के नाहल गांव के निवासी हैं। CJP प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका मुख्य रूप से आंदोलन में शामिल लोगों के लिए भोजन और पीने के पानी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की रही। शुरुआत में वे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे और पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्थाएं संभालते थे, लेकिन प्रदर्शन के अंतिम चरण में उनकी पहचान प्रतिभागियों के बीच एक प्रमुख सहयोगी के रूप में बनने लगी।
बताया गया है कि उन्होंने आंदोलन के भीतर कोई औपचारिक पद नहीं संभाला था। उनकी जिम्मेदारी प्रदर्शन स्थल पर आने वाले लोगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना थी। इसी भूमिका के कारण उनका नाम उस समय चर्चा में आया, जब पुलिस उनके घर पहुंची और तलाशी की कार्रवाई की गई।
परिवार का कहना है कि तलाशी के दौरान कुछ दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए गए। उनके अनुसार, पुलिस उनके पिता को पूछताछ के लिए थाने भी लेकर गई थी। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदारों को भी अलग-अलग स्थानों पर परेशान किया गया, जिससे पूरे परिवार में चिंता का माहौल बना हुआ है।
दूसरी ओर, संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से पहले इन आरोपों का खंडन किया जा चुका है। विशेष रूप से मेरठ में रिश्तेदारों को हिरासत में लेने या उनके खिलाफ किसी कार्रवाई के दावों को पुलिस ने अस्वीकार करते हुए कहा था कि संबंधित थानों में ऐसी किसी कार्रवाई का रिकॉर्ड नहीं मिला। इस कारण मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
अब इस पूरे प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके निर्देश महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध तथ्यों और संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। ऐसे में इस मामले की अगली सुनवाई और न्यायालय की टिप्पणी पर सभी की नजर बनी हुई है।
