घरेलू क्रिकेट के स्टार से भारत के नए तेज गेंदबाज बने यश ठाकुर जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू कर शुरू किया अंतरराष्ट्रीय सफर
28 दिसंबर 1998 को कोलकाता में जन्मे यश ठाकुर ने घरेलू क्रिकेट में विदर्भ का प्रतिनिधित्व किया और वहीं से अपने क्रिकेट करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। शुरुआत से ही उन्होंने अपनी गेंदबाजी में अनुशासन बनाए रखा और हर टूर्नामेंट में लगातार विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। रणजी ट्रॉफी विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंटों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें देश के उभरते तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल कर दिया।
यश ठाकुर की सबसे बड़ी ताकत उनकी सटीक लाइन लेंथ धीमी गेंदों का प्रभावी इस्तेमाल और डेथ ओवरों में बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की क्षमता है। यही वजह रही कि आईपीएल में भी उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। लखनऊ सुपर जायंट्स और पंजाब किंग्स जैसी टीमों की ओर से खेलते हुए उन्होंने कई अहम मौकों पर विकेट हासिल किए और अपनी उपयोगिता साबित की। आईपीएल में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने उनके लिए भारतीय टीम के दरवाजे खोल दिए।
भारतीय चयनकर्ताओं ने पहले उन्हें इंडिया ए टीम में शामिल किया जहां श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने शानदार गेंदबाजी की। ट्राई सीरीज के तीन मुकाबलों में पांच विकेट लेने के साथ ही श्रीलंका ए के खिलाफ अनऑफिशियल टेस्ट मैचों में भी पांच विकेट हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह बड़े स्तर पर खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसी प्रदर्शन का इनाम उन्हें जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में चयन के रूप में मिला और दूसरे टी20 मुकाबले में उन्हें डेब्यू कैप पहनने का अवसर प्राप्त हुआ।
यश ठाकुर का सफर केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह संघर्ष और समर्पण की कहानी भी है। उनके पिता हमेशा चाहते थे कि उनका बेटा एक दिन भारत के लिए खेले और अब यश ने टीम इंडिया के लिए मैदान पर उतरकर उस सपने को साकार कर दिया। यह उपलब्धि उन सभी युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है जो घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सपना देखते हैं।
अगर उनके क्रिकेट रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यश ठाकुर ने टी20 क्रिकेट के 74 मुकाबलों में 110 विकेट लेकर अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया है। आईपीएल के 22 मैचों में उनके नाम 27 विकेट दर्ज हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 32 मैचों में 93 विकेट हासिल किए हैं जबकि लिस्ट ए क्रिकेट के 57 मुकाबलों में 90 विकेट लेकर अपनी निरंतरता साबित की है। यही आंकड़े बताते हैं कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य के लिए एक ऐसा तेज गेंदबाज मिला है जो आने वाले वर्षों में टीम की गेंदबाजी आक्रमण का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
