क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
पूरा मामला तब सामने आया जब एक युवक ने पुलिस आयुक्त से शिकायत कर आरोप लगाया कि अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के उसकी पत्नी से अनैतिक संबंध हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि थाने में पदस्थ आरक्षक नंदकिशोर इस पूरे मामले में टीआई का सहयोग कर रहा था और महिला पर दबाव बनाने में उसकी भूमिका थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को निलंबित कर दिया।
मामले की जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सुनील शर्मा के खिलाफ गुना कोतवाली में पहले से एक आपराधिक प्रकरण दर्ज है और यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को निर्धारित है। इसके बावजूद उन्हें भोपाल जैसे संवेदनशील जिले के वीआईपी थाने का प्रभार सौंपा गया, जिसने विभागीय प्रक्रिया और नियमों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस मुख्यालय ने वर्षों पहले ही ऐसे मामलों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। 15 अक्टूबर 2014 को जारी आदेश में कहा गया था कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले, विभागीय जांच, भ्रष्टाचार अथवा लोकायुक्त संबंधी प्रकरण लंबित हों, उन्हें थानों या अन्य संवेदनशील पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। इसके बाद 17 जून 2025 को भी पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को दोबारा निर्देश जारी कर कहा था कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण, नैतिक अधःपतन या अवैध निरोध जैसे गंभीर आरोप लंबित हों, उन्हें थानों, क्राइम ब्रांच या किसी महत्वपूर्ण कार्यालय में पदस्थ नहीं किया जाए।
इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सुनील शर्मा की नियुक्ति ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पोस्टिंग से पहले उनके सेवा रिकॉर्ड और लंबित मामलों की जांच की गई थी। यदि जांच हुई थी तो नियमों के बावजूद उन्हें संवेदनशील जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई। वहीं यदि जांच नहीं हुई तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया में बड़ी चूक मानी जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग की जवाबदेही पर भी बहस तेज हो गई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि पोस्टिंग नियमों के विपरीत हुई है तो क्या केवल संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी या फिर ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी जिन्होंने नियमों के बावजूद यह पदस्थापना की।
डीसीपी जोन-3 विकास सेहवाल ने बताया कि महिला के पति की शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला केवल एक थाना प्रभारी के निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस विभाग की पारदर्शिता, पोस्टिंग प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर बहस का विषय बन चुका है।
