ओपी राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप, दलितों के उत्पीड़न और आपराधिक मामलों को लेकर अखिलेश यादव को दी नसीहत
ओपी राजभर ने सार्वजनिक रूप से अखिलेश यादव से सवाल करते हुए कहा कि क्या उनकी पार्टी के लोगों को गरीबों, पिछड़ों और दलितों को परेशान करने में आनंद आता है। उनका दावा था कि प्रदेश में जब भी हत्या, मारपीट, जमीन विवाद, चोरी या अन्य आपराधिक घटनाओं की जांच होती है तो कई मामलों में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के नाम सामने आने की बात कही जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी स्तर पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे गलत संदेश जाता है।
राजभर ने आजमगढ़ जिले का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी के एक सांसद पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित सांसद और उनके परिजनों पर जमीन कब्जाने तथा स्थानीय लोगों को धमकाने जैसे आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो पार्टी नेतृत्व को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर गरीब और दलित परिवारों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई है।
अपने बयान में राजभर ने एक दलित महिला की जमीन से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला की भूमि पर कब्जा करने के लिए दबाव बनाया गया और कथित रूप से धमकी तथा दुर्व्यवहार की घटनाएं हुईं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित जमीन के चारों ओर बिजली का करंट प्रवाहित करने वाले तार लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से भी इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजभर ने समाजवादी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विपक्ष को भविष्य में प्रभावी भूमिका निभानी है तो उसे अपने संगठन के भीतर अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि यदि पार्टी ऐसे विवादों पर समय रहते नियंत्रण नहीं करती है तो उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में एक मजबूत और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और गर्माने वाले माने जा रहे हैं। एक ओर सत्ता पक्ष विपक्ष पर कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं विपक्ष भी सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लगातार हमलावर है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन आरोपों और उनके जवाब को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल ओपी राजभर के बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जबकि आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
