कॉमनवेल्थ गेम्स का मेजबान बनने की दौड़ में कौन कितना आगे जानिए 1930 से 2026 तक का पूरा इतिहास
पहले संस्करण का आयोजन कनाडा के हैमिल्टन शहर में हुआ था जहां केवल 11 देशों ने भाग लिया था। इसके बाद प्रतियोगिता का विस्तार लगातार बढ़ता गया और 2022 तक इसमें 72 देशों की भागीदारी दर्ज की गई। 2026 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भी कई देश अपनी चुनौती पेश करेंगे और खेलों का रोमांच नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।
मेजबानी के रिकॉर्ड की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया इस मामले में सबसे आगे है। ऑस्ट्रेलिया ने अब तक पांच बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की है और इस उपलब्धि के साथ वह सबसे सफल मेजबान देश बना हुआ है। कनाडा चार बार इन खेलों का आयोजन कर दूसरे स्थान पर है जबकि स्कॉटलैंड 2026 में चौथी बार मेजबानी करेगा। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड तीन तीन बार इन खेलों की मेजबानी कर चुके हैं।
भारत ने वर्ष 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स का सफल आयोजन किया था। यह पहला अवसर था जब भारत को इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी मिली। इस आयोजन ने देश की खेल अधोसंरचना को नई पहचान दी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आयोजन क्षमता को भी मजबूती से स्थापित किया। मलेशिया जमैका और वेल्स भी एक एक बार इन खेलों की मेजबानी कर चुके हैं।
अविभाजित भारत ने 1934 और 1938 के संस्करणों में ब्रिटिश शासन के अधीन भाग लिया था जबकि 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत और पाकिस्तान ने अलग अलग देशों के रूप में प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू किया। बाद में 1971 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद बांग्लादेश भी इस खेल परिवार का हिस्सा बना। ऑस्ट्रेलिया कनाडा इंग्लैंड न्यूजीलैंड स्कॉटलैंड और वेल्स ऐसे देश हैं जिन्होंने अब तक आयोजित प्रत्येक कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
वर्ष 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन 28 जुलाई से 8 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में होगा। यह शहर चौथी बार इन खेलों की मेजबानी करेगा। इस बार भी दुनिया भर के खिलाड़ी पदकों के लिए संघर्ष करेंगे और राष्ट्रमंडल देशों के बीच खेल भावना तथा प्रतिस्पर्धा का शानदार उदाहरण देखने को मिलेगा।
करीब सौ वर्षों का सफर तय कर चुके कॉमनवेल्थ गेम्स आज केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि राष्ट्रमंडल देशों के बीच सहयोग मित्रता और खेल संस्कृति का सबसे बड़ा मंच बन चुके हैं। हर नया संस्करण इस गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।
