July 18, 2026

सिंगरौली में 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते वन विभाग का बीट गार्ड रंगे हाथ गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

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मध्य प्रदेश। सिंगरौली जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग के एक बीट गार्ड को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई बरगवां रेंज के ओबरी जंगल चौकी क्षेत्र में की गई। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया और आरोपी कर्मचारी को रिश्वत की रकम स्वीकार करते समय मौके पर ही पकड़ लिया। घटना के बाद वन विभाग के स्थानीय कार्यालयों में हलचल का माहौल बन गया।

जानकारी के अनुसार, ओबरी बीट में पदस्थ बीट गार्ड अखिलेश शुक्ला पर क्षेत्र के निवासी रामलोचन प्रजापति से एक शासकीय कार्य के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता ने कथित रूप से बार-बार रिश्वत की मांग से परेशान होकर लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच और तथ्यों का सत्यापन किया, जिसमें शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई।

सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए विशेष योजना बनाई। निर्धारित समय पर शिकायतकर्ता को रासायनिक पदार्थ लगे दो हजार रुपये के नोट दिए गए और उसे आरोपी के पास भेजा गया। जैसे ही बीट गार्ड ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की राशि स्वीकार की, पहले से निगरानी कर रही लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आरोपी के हाथ धुलवाए गए। परीक्षण में हाथों का रंग गुलाबी होने से रासायनिक पदार्थ के संपर्क की पुष्टि हुई, जिसे ट्रैप कार्रवाई का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। इसके बाद टीम ने रिश्वत की राशि बरामद कर आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई शुरू की।

लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता की सूचना और उसके सत्यापन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आरोपी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही मामले से जुड़े अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं ताकि आगे की वैधानिक प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा सके।

कार्रवाई के बाद आरोपी बीट गार्ड को बरगवां स्थित सर्किट हाउस ले जाया गया, जहां पूछताछ, दस्तावेजी औपचारिकताओं और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में यदि अतिरिक्त साक्ष्य सामने आते हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।

इस कार्रवाई के बाद वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच चर्चा का माहौल है। लोकायुक्त की इस ट्रैप कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर नियमानुसार जांच की जाती है और शिकायत सही पाए जाने पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। ऐसे मामलों में नागरिकों से भी अपील की जाती है कि यदि किसी सरकारी कार्य के बदले अवैध धनराशि की मांग की जाए तो उसकी सूचना संबंधित जांच एजेंसियों को दें, ताकि निष्पक्ष कार्रवाई की जा सके।

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