ईरान के विदेश मंत्री अराघची का अमेरिका और इजरायल पर तीखा आरोप, बोले- आलोचकों की आवाज दबाने में हो रहा टैक्सदाताओं के धन का इस्तेमाल
विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका की रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिका में विदेशी प्रभाव को लेकर लगातार चर्चा होती है, लेकिन इजरायल से जुड़े कथित प्रभाव अभियानों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उनके अनुसार यह गंभीर विषय है और इससे अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा सार्वजनिक विमर्श पर असर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों को समय के साथ सार्वजनिक किया जाएगा।
अराघची ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका को ऐसे संघर्षों में शामिल करने की कोशिश की जा रही है, जो उसकी प्राथमिकताओं का हिस्सा नहीं रहे हैं। उनका कहना था कि पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों में सभी पक्षों को संयम और कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास करना चाहिए। हालांकि उनके आरोपों पर अमेरिका या इजरायल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
इस बीच क्षेत्रीय तनाव को लेकर ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व की ओर से भी कड़े बयान सामने आए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े एक वरिष्ठ सैन्य सलाहकार ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो संघर्ष का दायरा और व्यापक हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब तक ईरान ने स्थिति को बड़े क्षेत्रीय संकट में बदलने से रोकने के लिए संयम बरता है, लेकिन लगातार हमलों की स्थिति में उसकी प्रतिक्रिया अधिक व्यापक हो सकती है।
सैन्य सलाहकार ने यह भी संकेत दिया कि यदि हालात नहीं बदले तो ईरान अपनी अतिरिक्त सैन्य क्षमताओं को सक्रिय कर सकता है। उनके अनुसार भविष्य की रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी। इन बयानों ने पहले से ही संवेदनशील पश्चिम एशियाई स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा समय में पश्चिम एशिया की स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ती जा रही है। ऐसे हालात में किसी भी पक्ष की ओर से उठाया गया बड़ा कदम क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच आगे होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक पहल सबसे प्रभावी विकल्प हो सकते हैं। फिलहाल सभी पक्षों के बयानों और संभावित कदमों पर वैश्विक स्तर पर करीबी नजर रखी जा रही है, क्योंकि इनका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।
