पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन
दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। उनका पुराना शायराना बयान कि समुद्र का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना मैं लौटकर आऊंगा एक बार फिर चर्चाओं में है। उपचुनाव को लेकर उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जनता के बीच विनम्रता के साथ स्वीकार किया कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारेंगे और अपने व्यवहार तथा कार्यशैली में बदलाव लाकर लोगों का विश्वास दोबारा जीतने का प्रयास करेंगे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अब तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन राजनीतिक हलकों में नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।
उधर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर अपने भोपाल स्थित निवास के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगा दिया। पोस्टर में साफ लिखा गया है कि भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे के चोरों और चढ़ावा चोरों का उनके घर में प्रवेश निषिद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने का ऐलान भी किया है। उनका कहना है कि यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य केवल चंदे में पारदर्शिता की मांग करना है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।
राजनीतिक हलचल के बीच नर्मदापुरम जिले के केसला क्षेत्र से आई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में धुत होकर कक्षा में ही सोता मिला। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया जबकि शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया। बाद में शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में शराब नहीं पीने का वादा किया लेकिन घटना ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी।
इधर मंत्रालय के गलियारों में भी एक महिला मंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि वे अपने विभाग में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति चाहती हैं ताकि विभागीय कामकाज पर बेहतर नियंत्रण स्थापित हो सके। चर्चा यह भी है कि विभाग में बड़े टेंडर और तबादलों को लेकर मंत्री और विभाग की वरिष्ठ अधिकारी के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रदेश में एक ही दिन सामने आई इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि मध्य प्रदेश में राजनीति प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लगातार नए रंग दिखा रहे हैं। आने वाले दिनों में उपचुनाव पदयात्रा और प्रशासनिक फैसलों के साथ इन घटनाओं का असर प्रदेश की सियासत में और अधिक दिखाई दे सकता है।
