August 30, 2026

पाकिस्तान में 500 किलो मानव प्लेसेंटा बरामद, भेड़ की नाल बताकर विदेश भेजने की थी तैयारी

0
27-jun-8-1782550282

नई दिल्ली । पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से मानव अंगों की कथित तस्करी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफआईए ने दावा किया है कि उसने छापेमारी के दौरान करीब 500 किलोग्राम मानव प्लेसेंटा यानी गर्भनाल बरामद की है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस प्लेसेंटा को भेड़ की गर्भनाल बताकर विदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी। मामले में तीन चीनी नागरिकों और दो पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया गया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अस्पतालों से मानव प्लेसेंटा एकत्र कर उसे पशु उत्पाद के रूप में घोषित करते थे ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तस्करी की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए सभी नमूनों को वैज्ञानिक जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है ताकि यह पुष्टि की जा सके कि बरामद सामग्री वास्तव में मानव प्लेसेंटा ही है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पाकिस्तान में अपनी तरह का पहला बड़ा मामला माना जा रहा है। आरोप है कि इस नेटवर्क के सदस्य इस्लामाबाद और रावलपिंडी के अस्पतालों से प्रत्येक प्लेसेंटा बेहद कम कीमत पर खरीदते थे और बाद में उसे विदेश भेजकर भारी मुनाफा कमाने की योजना बनाते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर भेज दिया गया।

क्या होता है प्लेसेंटा

प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान बनने वाला एक अस्थायी अंग होता है जो मां और गर्भ में पल रहे शिशु के बीच पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। यह गर्भनाल के माध्यम से भ्रूण से जुड़ा रहता है और बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रसव के बाद इसकी आवश्यकता समाप्त हो जाती है और यह शरीर से बाहर निकल जाता है।

किस काम आता है प्लेसेंटा

दुनिया के कई देशों में प्लेसेंटा का उपयोग चिकित्सा अनुसंधान और कुछ विशेष उपचारों में किया जाता है। इससे प्राप्त ऊतकों का इस्तेमाल गंभीर जलन, गहरे घाव, अल्सर और आंखों से जुड़ी कुछ सर्जरी में किया जाता है। कुछ शोधों में प्लेसेंटा से प्राप्त जैविक तत्वों के संभावित चिकित्सीय उपयोगों पर भी अध्ययन जारी हैं। हालांकि इसके संग्रह, संरक्षण और उपयोग के लिए अधिकांश देशों में सख्त कानूनी और नैतिक नियम लागू हैं।

कुछ देशों में पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर प्लेसेंटा का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है, लेकिन ऐसे उपयोग वैज्ञानिक रूप से सार्वभौमिक रूप से स्वीकार नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानव जैविक ऊतकों का किसी भी प्रकार का व्यापार या निर्यात केवल संबंधित कानूनों और चिकित्सा मानकों के तहत ही किया जाना चाहिए।

फिलहाल पाकिस्तान की जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित तस्करी का अंतिम गंतव्य कौन सा देश था और इसमें किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका हो सकती है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला मानव जैविक सामग्री की अवैध तस्करी के सबसे बड़े मामलों में शामिल हो सकता है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *