अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल कर 2.77 करोड़ की उगाही का आरोप, यूथ कांग्रेस नेता समेत दो गिरफ्तार
नई दिल्ली । कर्नाटक के मंगलुरु में एक कारोबारी से करोड़ों रुपये की कथित जबरन वसूली के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पुलिस ने एक व्यापारी को ब्लैकमेल कर लगभग 2.77 करोड़ रुपये वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस के एक पदाधिकारी और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार मामला केवल आर्थिक उगाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सुनियोजित धोखाधड़ी, मानसिक दबाव और फर्जी घटनाक्रम रचने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान यूथ कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारी निजाम और उसके सहयोगी जितेश के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर व्यापारी को पहले निजी और संवेदनशील सामग्री के आधार पर निशाना बनाया गया। आरोप है कि व्यापारी की अश्लील तस्वीरों और वीडियो का उपयोग कर उसे ब्लैकमेल किया गया तथा बदनामी का डर दिखाकर बड़ी रकम की मांग की गई।
जांच अधिकारियों के अनुसार शुरुआत में व्यापारी से 35 लाख रुपये मांगे गए थे। आरोपियों ने कथित रूप से वीडियो सार्वजनिक करने और परिवार तक पहुंचाने की धमकी दी थी। सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक छवि को नुकसान पहुंचने की आशंका के चलते व्यापारी ने रकम का भुगतान कर दिया। हालांकि इसके बाद भी पैसों की मांग बंद नहीं हुई और कथित तौर पर लगातार दबाव बनाया जाता रहा।
मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित ने सहायता के लिए निजाम से संपर्क किया। व्यापारी को उम्मीद थी कि वह विवाद सुलझाने में मदद करेगा, लेकिन पुलिस का दावा है कि निजाम भी कथित उगाही की पूरी योजना में शामिल था। जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर व्यापारी पर दबाव बनाए रखने के लिए एक और साजिश रची।
पुलिस के अनुसार मई 2024 में व्यापारी को यह विश्वास दिलाया गया कि जितेश ने आत्महत्या कर ली है। आरोपियों ने कथित तौर पर एक फर्जी सुसाइड नोट का हवाला दिया, जिसमें व्यापारी का नाम होने की बात कही गई। इसके साथ ही मौत और अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरें दिखाकर यह साबित करने का प्रयास किया गया कि घटना वास्तविक है। व्यापारी को यह भी बताया गया कि उसके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के भय से व्यापारी लगातार पैसे देता रहा। पुलिस का दावा है कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच विभिन्न माध्यमों से कुल 2.77 करोड़ रुपये की उगाही की गई। इस दौरान पीड़ित मानसिक दबाव और सामाजिक बदनामी की आशंका में आरोपियों की मांगें पूरी करता रहा।
मामले का खुलासा तब हुआ जब जून 2026 में व्यापारी ने जितेश को मंगलुरु में जीवित देखा। जिस व्यक्ति को वह मृत समझ रहा था, उसे सामने देखकर उसे पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ। इसके बाद उसने उरवा पुलिस स्टेशन पहुंचकर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दी।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियां अब वित्तीय लेन-देन, कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क और मामले से जुड़े अन्य संभावित पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस कथित रैकेट में अन्य लोग भी शामिल थे।
गिरफ्तारी के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। सोशल मीडिया पर विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों और नेताओं के साथ आरोपी की तस्वीरें साझा की जा रही हैं। हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल पूरा ध्यान आरोपों की सत्यता, वित्तीय रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच पर केंद्रित है।
