August 25, 2026

खंडवा के 7 गांवों में ज़हरीला पानी बना अभिशाप, फ्लोराइड संकट पर कांग्रेस हमलावर; बीजेपी विधायक मीडिया सवालों से बचते नजर आए

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खंडवा । मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पीने के पानी को लेकर एक गंभीर स्वास्थ्य संकट सामने आया है। किल्लौद ब्लॉक के सात गांवों में लोग लंबे समय से फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। पानी में फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंचने के बावजूद न तो प्रशासन ने ठोस कदम उठाए और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है।

कांग्रेस ने खंडवा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किल्लौद ब्लॉक के ग्रामीण कई दिनों से दूषित और फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं जिससे उन्हें गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते हुए हैंडपंप और ट्यूबवेल पर लाल निशान लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। न तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों की मेडिकल जांच कराई गई और न ही पीने के सुरक्षित पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है जैसा कि हाल ही में इंदौर में देखने को मिला। नेताओं ने कहा कि हादसे के बाद नेता और अधिकारी पीड़ित परिवारों के यहां पहुंचकर संवेदनाएं जताते हैं लेकिन समय रहते अगर व्यवस्था सुधारी जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि ग्रामीणों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है।

इस पूरे मामले पर जब स्थानीय बीजेपी विधायक नारायण पटेल से मीडिया ने सवाल पूछे तो उनका रवैया और भी विवादों में आ गया। पहले अन्य मुद्दों पर मीडिया से बातचीत करने वाले विधायक जैसे ही किल्लौद ब्लॉक में फ्लोराइड युक्त पानी का सवाल सामने आया बिना कोई जवाब दिए वहां से चले गए। मीडियाकर्मी लगातार सवाल पूछते रहे लेकिन विधायक ने चुप्पी साधे रखी। उनके इस रवैये ने न केवल विपक्ष बल्कि आम लोगों में भी नाराजगी बढ़ा दी है।ग्रामीणों का कहना है कि फ्लोराइड की अधिक मात्रा ने उनकी जिंदगी मुश्किल कर दी है। कई गांवों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 2.0 से 5.0 पीपीएम तक पाई गई है जबकि सुरक्षित सीमा इससे कहीं कम मानी जाती है। इसके चलते लोग फ्लोरोसिस दांत गिरने आंखों की रोशनी कमजोर होने बाल सफेद होने और जोड़ों में असहनीय दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई परिवारों में बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। साफ पानी की मांग और स्वास्थ्य जांच की अपील सिर्फ आश्वासनों तक सीमित रह गई है।यह मामला केवल पानी की गुणवत्ता का नहीं बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही और संवेदनशीलता का भी है। सवाल यह है कि क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही कार्रवाई होगी या फिर समय रहते ग्रामीणों को इस धीमे जहर से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल किल्लौद के गांवों में रहने वाले लोग उम्मीद और चिंता के बीच अपनी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

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