भारत-बांग्लादेश संबंध नाजुक, भारत का रुख मजबूरी नहीं: पूर्व एंबेसडर सैयद अकबरउद्दीन का विश्लेषण
अकबरउद्दीन ने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति ब्लैक-एंड-व्हाइट (सही-गलत) में नहीं देखी जा सकती। इसमें कई ग्रे शेड्स हैं, और भारत वही स्टैंड अपनाता है जो उसके हित में हो। उन्होंने फिलिस्तीन पर भारत की नीति को उदाहरण बताते हुए कहा कि 1947 से लेकर आज तक भारत ने कभी भी फिलिस्तीन के खिलाफ वोट नहीं किया है।
बांग्लादेश से जुड़े विवाद पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह घरेलू राजनीति से प्रेरित है। वर्तमान में वहां कोई स्थायी चुनी हुई सरकार नहीं है और चुनाव आने वाले हैं। अकबरउद्दीन ने जोर देकर कहा कि इसे सुरक्षा खतरे या राष्ट्रीय अपमान से जोड़ना गलत है। भारत और बांग्लादेश के बीच आम नागरिकों के स्तर पर मजबूत रिश्ते हैं, और यह नाजुक स्थिति स्थायी संकट नहीं है।
पाकिस्तान के साथ बातचीत पर उन्होंने कहा कि बातचीत जरूर होनी चाहिए, लेकिन उसके लिए माहौल बनाना आवश्यक है।
अकबरउद्दीन के करियर पर नजर डालें तो वे 1985 बैच के IFS अफसर हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में फर्स्ट सेक्रेटरी के तौर पर काम किया, ACABQ की सदस्यता निभाई और भारत के काउंसलर के रूप में पाकिस्तान में सेवाएं दीं। उन्होंने सऊदी अरब और मिस्र में काउंसिलर और सचिव के रूप में कार्य किया और 2012 से 2015 तक विदेश मंत्रालय में आधिकारिक प्रवक्ता रहे। अक्टूबर 2015 में भारत-अफ्रीका फोरम समिट में वे चीफ कॉर्डिनेटर थे।
अकबरउद्दीन के अनुसार, 21वीं सदी की कूटनीति और डिफेंस रणनीति परंपरागत युद्ध मॉडल से अलग हैं, और भारत के हितों की प्राथमिकता के आधार पर ही अंतरराष्ट्रीय रुख तय किया जाता है।
