March 8, 2026

सुप्रीम कोर्ट: अंतरिम आदेश में मुस्लिम पक्ष को आंशिक राहत

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Supreme court
  • नए वक्फ कानून पर स्टे से इनकार, कुछ प्रावधानों पर लगाई रोक

  • कलेक्टर नहीं कर सकता विवाद तय

  • इन तीन प्रावधानों पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम आदेश में देश में लागू नए वक्फ संशोधन कानून, 2025 पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन उसके कुछ प्रावधानों पर अमल रोक दिया। इसमें मुख्य रूप से कलेक्टर की अतिक्रमण विवाद सुलझाने की शक्तियों और वक्फ करने के लिए पांच साल तक मुस्लिम मतावलंबी होने के प्रावधान शामिल हैं।

चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह ने यह आदेश सुनाते हुए वक्फ संशोधन का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं की यह मांग मानने से इनकार कर दिया कि पूरे कानून पर रोक लगाई जाए। मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने कानून को असंवैधानिक घोषित करने और अंतरिम आदेश के जरिए पूरी तरह रोक की मांग की थी। बेंच ने आदेश में कहा कि संसद की ओर से बनाए किसी भी कानून की संवैधानिकता की धारणा होती है और उसे केवल अत्यंत दुर्लभ मामलों में ही रोका जा सकता है। आदेश सुनाते हुए सीजेआइ गवई ने कहा कि हमने प्रत्येक धारा को दी गई प्रथम दृष्टया चुनौती पर विचार किया है लेकिन यह कानून के संपूर्ण प्रावधानों पर रोक लगाने का मामला नहीं बनता। इसलिए यह मांग खारिज की जाती है लेकिन कुछ धाराओं से संरक्षण दिए जाने की जरूरत है। हम नए कानून के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा रहे हैं। इस मामले में सीजेआइ की बेंच ने लगातार तीन दिन तक सुनवाई कर अंतरिम आदेश पर 22 मई को फैसला सुरक्षित रखा था। शेषञ्चपेज १०

धार्मिक मामलों में दखल के आधार पर चुनौती :

संसद से पारित होने और राष्ट्रपति से मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने गत आठ अप्रेल को संशोधित वक्फ कानून लागू किया था। मुस्लिम संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों ने इसे मुस्लिम अल्पसंख्यकों के धार्मिक मामलों के मौलिक अधिकार में दखल बताते हुए कानून की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। चुनौती देने वालों में मुस्लिम संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए- हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी, एआइएमआइएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, राजद, सपा, सीपीआइ, डीएमके शामिल थे। भाजपा शासित असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र की सरकारों ने संशोधित कानून के पक्ष में याचिका दायर की थी।

अंतिम आदेश के लिए होगी आगे सुनवाई :

शीर्ष अदालत ने अभी वक्फ संशोधन कानून पर अंतरिम आदेश दिया है। इस कानून पर आने वाले समय में विस्तृत सुनवाई होगी और अंतिम फैसला आएगा। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि उसके निर्देश प्रथम दृष्टया दृष्टिकोण पर आधारित हैं तथा अंतिम सुनवाई में अधिनियम के प्रावधानों की वैधता के संबंध में पक्षकारों को प्रस्तुतियां देने से नहीं रोका जाएगा।

इन मामलों में भी नहीं दी विरोधियों को राहत :

कानून को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं और उनके दिग्गज वकीलों ने अदालत के समक्ष नए वक्फ कानून के अनेक प्रावधानों पर आपत्तियां की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन मुद्दों पर उन्हें राहत नहीं दी।

-गैर-मुस्लिम वक्फ नहीं बना सकते

-वक्फ करने के लिए संपत्ति पर मालिकाना हक जरूरी

-सरकारी जमीन पर वक्फ नहीं

-आदिवासी अधिसूचित क्षेत्र में वक्फ नही

-वक्फ से जुड़े दावों पर लिमिटेशन एक्ट लागू होगा।

1. धारा-3 (R) इस्लाम का अनुयायी: किसी व्यक्ति द्वारा वक्फ बनाने के लिए कम से कम पांच वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना चाहिए। इसलिए रोक: जब तक राज्य सरकारें नियम आदि कोई व्यवस्था न बना लें तब तक रहेगी रोक। बेंच ने कहा कि ऐसी व्यवस्था के बिना, प्रावधान मनमानी को बढ़ावा दे सकता है।

2. धारा-3सी (2-3-4) अतिक्रमण विवाद पर कलेक्टर को शक्ति: अतिक्रमण विवाद पर नामित अधिकारी (कलेक्टर या अन्य वरिष्ठ अधिकारी) द्वारा निर्णय लंबित रहने तक सरकार को वक्फ भूमि की मान्यता रद्द करने की शक्ति। इसलिए रोक: कलेक्टर को विवाद का निर्णय लेने की अनुमति देना शक्तियों के पृथक्करण के विरुद्ध है। जब तक ट्रिब्यूनल या न्यायालय द्वारा स्वामित्व का निर्णय नहीं हो जाता, तब तक विवादित वक्फ भूमि प्रभावित नहीं होगी। विवाद का निर्णय होने तक ऐसी भूमि पर किसी तीसरे पक्ष के अधिकार का सृजन नहीं किया जाना चाहिए।

3. धारा-9,14 वक्फ संस्थाओं में सदस्यों की नियुक्ति: वक्फ बोर्ड के 11 सदस्यों में गैर-मुस्लिम सदस्य भी शामिल होंगे। इसलिए आंशिक रोक: राज्यों के वक्फ बोर्ड में 3 से ज्यादा गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं हो सकते वहीं केंद्रीय वक्फ परिषद में भी 4 से ज्यादा गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल नहीं होंगे। यानी इन संस्थाओं में बहुमत मुस्लिम धर्मावलंबियों का रहेगा।

धारा-23 वक्फ बोर्ड सीईओ: वक्फ प्रबंधन के लिए कोई भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया जा सकता है।

यह दिया सुझाव: वक्फ संस्था का सीईओ यथासंभव मुस्लिम को ही बनाया जाए।

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