March 8, 2026

उत्तराखंड का एक किस्सा: दैत्य को उसी की तौली पर रख किया अधीन, गांव कहलाया दंतोली

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  • चलो गांव की ओर: दैत्य को उसी की तौली पर रख किया अधीन, गांव कहलाया दंतोली

  • पिथौरागढ़ की बाराबीसी विशिष्ट पट्टी में है चौहान वंशजों का अनूठा गांव

गांव कस्बों की बसासत, इतिहास और उनके नामकरण के रोचक किस्सों के साथ इस बार सैर कराते हैं सोरघाटी में बाराबीसी (240 गांवों वाली ) विशिष्ट पट्टी की ओर। यहां देवलथल परगना के एक भूभाग पर चौहान वंशजों ने जो गांव बसाया वह दंतोली कहलाया। लोककथाओं के अनुसार ज्यौड़ताल क्षेत्र के एक अत्याचारी दैत्यराज को परास्त कर बलिष्ठ चौहान वंशी ने उसी की तौली (बड़ी कढ़ाई) पर बैठा अपने अधीन किया था। तभी से गांव को दंतोली कहा जाने लगा। कनालीछीना ब्लाक (पिथौरागढ़) स्थित दंतोली गांव का इतिहास 13वीं से 14वीं सदी के बीच माना जाता है। यहां बसे चौहान क्षत्रिय शक्तिशाली राजपूज शासक पृथ्वीराज चौहान के वंशज कहे जाते हैं। 18वीं सदी की एक पांडुलिपि में राजा पृथ्वीराज चौहान की राजधानी दिल्ली व दंतोली गांव का उल्लेख मिलता है। लोककथाओं व चौहान वंशजों पर अध्ययन का हवाला दे पुरातत्वविद् चंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि मध्यकाल में दिल्ली व अजमेर की तरफ से पलायन कर दंतोली के साथ ही सिल, चमू, गुथना, जोशीगांव, बूंगा व बसौड़ में आकर उनके पूर्वज बसे।

मल्ल शासक ने दी कालठग न्यायी की संज्ञा
तब इस क्षेत्र में एक दैत्यराज का प्रकोप था। जिस गांव से नरबली लेनी हो वह उसे ज्यौड़ताल के घट पर भेजने का आदेश देता था। जब बलिष्ठ चौहान वंशज की बारी आई तो वह बगैर डरे बाबिल (लंबी घास) का झाडू व हांडी में दही भर ले गया। घट का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया। दैत्य ने बाल मांगे तो घास का झाड़ बाहर लटका दिया। दैत्य खींचते थक गया। फिर चौहान वंशज के कहने पर दैत्य ने बाल दिखाए तो बहादुर युवा ने उसके केशों को जकड़ कब्जे में कर लिया। दैत्य ने वचन दिया कि अत्याचार नहीं करेगा। तब मल्ल शासक ने चौहानों को कालठग न्यायी की उपाधि दी। यदि भूत प्रेत तंग करे भी तो वीररस की पंक्तियां ‘पर्वत धौलनागरी, ताकि भूमि दंतोली गांव…’ बोल छुटकारा मिल जाता है।

भुखमरी के दौर में बांटा था अनाज
दंतोली क्षेत्र में ठंड क्षेत्रों का देवदार, चीड़, बांज आदि के वन हैं तो घाटी में साल का जंगल भी है। परंपरागत फल भी खूब होते हैं। यहां के पवित्र केले से पेट के रोगों के उपचार की मान्यता है। कहते हैं कि 1948 में भुखमरी के दौर में दंतोली के चौहानों ने उपराऊ का धान, मडवा, गेहूं, दाल आदि बांटी थी।

कभी थे 500 परिवार
सैन्य बहुल चौहानों के सात गांवों में कभी 500 परिवार थे। ढाई हजार से ज्यादा की आबादी थी। पलायन से अब 14 परिवार हैं। पिथौरागढ़ से 29 किमी दूर दक्षिण पश्चिम में बसा है दंतोली।

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