June 24, 2026

उत्तराखंड चुनाव 2027: क्या भाजपा संगठन भी इस बार हार को तय मान कर चल रहा है!

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BJP Org. in weak possion in uttarakhand

BJP Org. in weak possion in uttarakhand

  • संगठन में तैया​रियों की कमी कार्यक्षमता को कर रही प्रभावित!

  • अब तो कई जगह जनता भी खुलकर बोल रही भाजपा के विरोध में…

उत्तराखंड में भाजपा संगठन किस हवा में उड़ रहा है कहा नहीं जा सकता! एक ओर जहां मध्यप्रदेश में 2028 में विधानसभा चुनाव से पहले ही वहां की भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा कर दी है। इस जारी सूची में कुल 106 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाया गया है। MP में संगठन ने अभी से तैयारियों के तहत दिग्गज नेताओं से लेकर नए चेहरों तक राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधने के लिए संगठन का बड़ा विस्तार किया है।

वहीं दूसरी ओर अगले चंद माह में उत्तराखंड में चुनाव होने वाले हैं, इसके बावजूद भी अब तक उत्तराखंड के संगठन की ओर से प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों की तक कोई घोषणा नहीं की गई है।
कुछ राजनीति के जानकारों का तो यहां तक मानना है कि या तो संगठन संभालने वाले कुभकर्णीय नींद में सो रहे हैं। या वे इसे लेकर गंभीर नहीं हैं, जिसका सीधा खमियाजा भाजपा ​को 2027 के चुनावों में उठाना पड़ेगा।

पार्टी की मजबूती

जानकारों के अनुसार हर कोई इस बात से वाकिफ है कि प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य ही जमीन पर कार्य कर पार्टी को मजबूत बनाते हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि प्रदेश में आने वाले चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू होती जातीं हैं। ऐसे में भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए इस नई टीम पर भरोसा रहता है। इसके पीछे की रणनीति संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर राजनीतिक आधार को और मजबूत किया जाना होता है।

नई प्रदेश कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवा कार्यकर्ताओं की ऊर्जा का समावेश पार्टी की भविष्य की रणनीति को दर्शाता है। प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों की यह टीम न केवल संगठनात्मक गतिविधियों को गति देती है बल्कि आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए भी पार्टी को मजबूत आधार प्रदान करती है।

कहां है उत्तराखंड में प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों की लिस्ट?

भाजपा की इस घोषणा को राजनीति में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक कदम माना जाता है, ऐसे में उत्तराखंड में अब तक कार्यसमिति के सदस्यों की घोषणा न होने की राजनीतिक चर्चा आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

लेकिन, चुनाव के इतने पास आने के बावजूद ऐसा होना ये दर्शाता है कि मानों उत्तराखंड में संगठन या तो किसी अभिमान से ग्रसित हो गया है, या वह जानबुझकर चुनावों को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं है। ऐसे में इसे लेकर अब तो प्रदेश में कई लोग ने य​ह तक कहना शुरु कर दिया है कि संगठन भी शायद ये मान चुका है कि इस बार हार पक्की है, तो ऐसे में क्यों अपनी शक्ति बर्बाद की जाए?

बीजेपी मध्यप्रदेश में संगठन का बड़ा विस्तार 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति घोषित

एक ओर जहां मध्यप्रदेश में सूची जारी होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है वहीं उत्तराखंड में अनेक कार्यकर्ता जो अभी तक सदस्य टीम में अपने आने की आशा बांधे हुए थे, उनका भी पार्टी से मोहभंग होता दिख रहा है।

चुनाव जीतना एक सपना

कई पूर्व में राजनीति से जुड़े लोगों का तो यहां तक मानना है कि यदि 1—2 माह उत्तराखंड में यहीं स्थिति रही तो भाजपा का 2027 में चुनाव जीतना एक सपना ही रह जाएगा। क्योंकि इस स्थिति में मुमकिन है कि प्रदेश में भाजपा के कई कद्दावर कार्यकर्ता पार्टी से दूर होना शुरु हो जाएंगे और वे अन्य पार्टी के लोगों के साथ अंतिम समय में आने वाली लिस्ट के समय रोने की अपेक्षा अभी से भाव ताव की स्थिति में अपने भार व प्रभाव के साथ उनसे जुड़ सकते हैं।

कई लोगों के द्वारा तो अनुमान तो यहां तक लगाए जा रहे है कि इसका ठीकरा सरकार व संगठन अपनी नाकामियों (अंकिता भंडारी मर्डर कैस व क्षेत्रों में विकास) को बचाते हुए यूजीसी और नीट पेपर लीक जैसी घटनाओं पर फोड़ने को तैयार बैठे है। जिसका सीधा असर पीएम मोदी पर पड़ेगा! जिसका शायद वे लाभ ले सकेंगे।

इन स्थितियों का अतत: क्या असर होता है ये तो चुनाव के बाद ही देखने को मिलेगा। लेकिन, वर्तमान में जहां भाजपा के कार्यकर्ता स्वयं उपापोह की स्थिति में हैं। वहीं अब तक तो यह तय माना जा रहा है कि यदि केंद्र की ओर से इस ओर नहीं देखा गया या स्वयं उत्तराखंड भाजपा संगठन के प्रमुख पदाधिकारी नहीं जागे तो इसका डेंट चुनाव में लगना तय है।

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