उत्तराखंड में बाघों की संख्या में वृद्धि के संकेत, कैमरा ट्रैप में कैद हुई तस्वीरें

रामनगर। अखिल भारतीय बाघ गणना के लिए लगाए गए कैमरा ट्रेप में बाघों की सक्रियता हर कैमरे में कैद हो रही, उनकी तस्वीरों ने क्षेत्र में बाघों की संख्या में अच्छी वृद्धि के संकेत हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से हर चार साल में फेज 4 की अखिल भारतीय बाघ गणना कराई जाती है। इसमें तकनीक का प्रयोग करने के साथ ही बाघों की तस्वीर खींचने के लिए जंगल में स्वचालित कैमरे लगाए गए हैं।
बाघ की तस्वीरें कैद करने के लिए जंगलों में लगातार 30 से 35 दिन तक कैमरे लगे रहते हैं। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला के निर्देश पर रामनगर वाले क्षेत्र में 550 ग्रिड बनाए गए हैं। जिसमें 11 सौ कैमरे लगाए लगाए गए हैं। यह कैमरे रामनगर के क्षेत्र से निकालकर अब कालागढ़ टाइगर रिजर्व में लगाए जाएंगे।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्या ने बताया कि जंगल के अंतर्गत 260 ग्रिड में 520 कैमरे लगाए गए हैं। यहां से भी अब कैमरे निकाले जा रहे हैं। रामनगर वन प्रभाग के एसडीओ अंकित बडोला के मुताबिक जंगल में 181 ग्रिड बनाई गई हैं। जिनमें 362 कैमरे लगाए गए हैं।
वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक जंगलों में जितने भी कैमरे लगाए गए हैं, अमूमन उन सभी में बाघों की अच्छी खासी तस्वीरें कैद होने की बात कही जा रही है। बीते माह मानव वन्य जीव संघर्ष के दौरान भी कैमरे चेक करने पर विभाग को उनमें कई बाघों की तस्वीरें मिली थी। इससे साफ है कि बाघों की अच्छी संख्या बढ़ने जा रही है। वर्ष 2026 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के जो आंकड़े आएंगे वह वन विभाग व सरकार के लिए सुखद होंगे।
जंगल – बाघ
कार्बेट टाइगर रिजर्व -260
रामनगर वन प्रभाग -063
तराई पश्चिमी वन प्रभाग -053
(नोट: यह आंकड़े 2022 की गणना के अनुसार है।)
