March 9, 2026

Rishikesh News: शर्मनाक, जंगल में हुआ प्रसव, गर्भवती को कोसों दूर खड़ी एबुलेंस तक ले जाने के बीच की घटना

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एक ओर जहां उत्तराखंड में सड़कों की बदतर हालत सड़क हादसों में इजाफा कर रही है। तो वहीं दूसरी ओर सड़क सुविधा की कमी होने के चलते एक गर्भवती को जंगल में ही प्रसव हो गया।

दरअसल सड़क की सुविधा नहीं होने से नरेंद्रनगर ब्लॉक के नौडू गांव की महिला का आधे रास्ते में जंगल में ही प्रसव हो गया। गांव की महिलाएं उसे 12 किमी दूर सड़क मार्ग तक पहुंचाने के लिए पल्ली में लेटाकर ले जा रहीं थीं। इसी समय सड़क से करीब पांच किमी पहले लंबधार के पास जंगल में ही महिला ने बच्चे काे जन्म दे दिया। गनीमत है कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की सुविधा नहीं होने से गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। गर्भवतियों या बीमार लोगों को सड़क तक पहुंचाने के लिए काफी मशक्कत झेलनी पड़ती है। जानकारों के अनुसार जहां एक ओर देश के विभिन्न राज्यों में शानदार सड़कें छोटे गांवों में तक कई साल पहले पहुंच गईं हैं। वहीं उत्तराखंड न केवल टूटी फूटी सड़कों को लेकर बल्कि कई जगहों पर तो सड़कों के न होने तक के लिए परेशान हो रहा है।

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नरेंद्रनगर ब्लॉक में हुई इस घटना पर ग्राम प्रधान नौडूकाटल की सीमा देवी ने बताया कि गुरुवार को नौडू गांव निवासी नीलम भंडारी (28) पत्नी गजेंद्र भंडारी को सुबह करीब आठ बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने 108 को सूचित किया, लेकिन सड़क सुविधा नहीं होने से एंबुलेंस काटल चौक पर ही खड़ी रही। गांव की महिलाएं गर्भवती को पल्ली में लेटाकर सड़क तक ले जाने लगीं। गांव से करीब पांच किमी दूर लंबधार में महिला को तीव्र प्रसव पीड़ा हुई। आधे रास्ते जंगल में ही महिला का प्रसव हो गया। ग्राम प्रधान ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। महिला की यह चौथी संतान है। महिला का पति पंजाब के एक होटल में काम करता है।

पूर्व में हो चुकी है सड़क निर्माण की घोषणा
नौडू गांव में करीब 45 परिवार रहते हैं। काटल चौक तक सड़क सुविधा है। यहां से नौडू गांव की दूरी करीब 12 किमी है। खास बात तो ये है कि वर्ष 2021-22 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांव में सड़क निर्माण की घोषणा थी।

वर्ष 2023 में लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर की ओर से प्रथम चरण में इसका सर्वे भी शुरू हो गया था। लेकिन, सड़क का निर्माण आज तक सर्वे से आगे नहीं बढ़ा है।

उदासीनता का दंश
इस पूरे मामले पर स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव में यदि सड़क सुविधा होती तो गर्भवतियों का प्रसव स्वास्थ्य केंद्र में होता। इस तरह आधे रास्ते मेंं प्रसव नहीं होता। कहा कि शासन-प्रशासन की उदासीनता का दंश स्थानीय ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है।

वहीं लोनिवि नरेंद्रनगर के अधिशासी अभियंता विजय कुमार मोगा का कहना है कि लोक निर्माण विभाग की ओर से काटल-नौडू गांव के लिए सड़क का सर्वे कार्य किया गया है। वन भूमि होने के कारण मामला लटक रहा है। अगस्त 2024 में इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। वन विभाग से क्लीन चिट मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

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