March 8, 2026

महाकाली मंदिर में होलिका अष्टमी पर बांधी गई चीर

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Holika Astami

– पिथौरागढ़ जिले में एकादशी से होगी खड़ी होली की शुरुआत

होलिका अष्टमी पर गंगोलीहाट के महाकाली मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच चीर बांधी गई। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। क्षेत्र के गांवों में एकादशी के दिन चीर बांधी जाएगी। इसी दिन से पिथौरागढ़ जिले के गांव-गांव खड़ी होली की धूम शुरू हो जाएगी।

सुबह 6:30बजे की गई चीर की प्रतिष्ठा
पिथौरागढ़ जिले में होली गायन की शुरुआत पौष माह से ही शुरू हो जाती है। फाल्गुन माह में होली पर्व पर चीर बांधे जाने का प्रचलन है। सबसे पहले अष्टमी पर्व पर महाकाली मंदिर परिसर में चीर बांधी जाती है। मंगलवार को होलिका अष्टमी को भद्रा से पहले लग्नानुसार प्रातः 6.30 बजे चीर प्रतिष्ठा कर मंत्रोच्चार के साथ बांधी गई। मंदिर पुरोहित पंकज पंत, दीप पंत, ओम प्रकाश जोशी ने विधि विधान से पूजा अर्चना संपन्न करवाई।

अष्टमी पर्व पर महाकाली मंदिर में सभी गांव के लोगों द्वारा चीर बंधन किया गया। इस अवसर पर पंडित भानु पंत, जीवन रावल, दिगम्बर रावल, महाकाली मंदिर समिति के अध्यक्ष हरगोविंद रावल, उपाध्यक्ष नीरज रावल, नवीन उप्रेती, मनोज उप्रेती, डिगर सिंह रावल, प्यारे लाल साह सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

गांवों में एकादशी पर्व पर बांधा जाएगा चीर
दशमी पर्व पर भद्रा के चलते एकादशी पर्व को गांवों में चीर बांधा जाएगा और दोपहर 2 बजे से सभी गांवों की होल्यार महाकाली मंदिर में होली गायन करेंगे इसके बाद गांवों घर- घर जाकर होल्यारों द्वारा खड़ी होली गायन का शुभारंभ किया जाएगा।

होलिका अष्टमी पर हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
होलिका अष्टमी पर गंगोलीहाट के महाकाली मंदिर में सुबह से ही लोग पहुंचने लगे थे। पूरे दिन मंदिर में दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। सभी गांवों से आए लोगों ने चीर बांधा और मंदिर में पूजा अर्चना की।

चिटगल देवी मंदिर में गाया बांधो कन्हैया ध्वजा चीर
गंगोलीहाट के चिटगल गांव के देवी मंदिर में होल्यारों ने चीर बांधा। इसके बाद बांधो कन्हैया ध्वजा चीर गाकर बैठकी होली गाई। देर शाम तक होल्यारों ने ढोलक और मजीरे की थाप पर भक्ति रस के होली गीत गाए।

पेड़ को स्थापित कर बांधे जाते हैं कपड़े के रंग बिरंगे टुकड़े
होली पर चीर बंधन कुमाऊं की मुख्य सांस्कृतिक परंपरा है। इसे होली के शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। गांव लोग एकादशी पर्व पर पदम या अन्य पेड़ को होली गायन स्थल पर स्थापित करते हैं। इसके बाद उस पेड़ पर हर घर से आए रंग-बिरंगे कपड़ों के टुकड़े बांधे जाते हैं। इसी को चीर कहा जाता है। इस चीर को होलिका का रूप माना जाता है। चीर बंधन के साथ ही खड़ी होली गायन की शुरुआत भी होती है। होली के दिन इस चीर को जला दिया जाता है। इस परंपरा को चीर दहन कहते हैं।

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