June 12, 2026

#Uksamachar की खबर का महा-असर: पंतनगर विवि में झुका प्रशासन, दागी फूड कॉन्ट्रैक्टर सस्पेंड; जांच कमेटी गठित

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GBPant university- Impact of News
  • DSW बोले- ‘हम बच्चों की देखभाल में जुटे’

पंतनगर। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के पटेल भवन हॉस्टल में 150 छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले कैंटीन माफिया पर ‘यूकेसमाचार (uksamachar)’ की खोजी रिपोर्ट का वज्रपात हुआ है। कल तक मामले को दबाने में जुटा विश्वविद्यालय प्रशासन चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार पूरी तरह बैकफुट पर आ गया है। इससे पहले इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों ने चुप्पी साध ली थी और कोई भी इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

लेटेस्ट अपडेट: फूड सर्विस निलंबित, जांच कमेटी बैठी
विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) विपिन ध्यानी ने ‘यूकेसमाचार (uksamachar)’ की खबर के बाद मचे हड़कंप पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दागी कॉन्ट्रैक्टर की फूड सर्विस को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति (Inquiry Committee) का गठन कर दिया गया है जो इस पूरे मेस घोटाले की जांच करेगी।


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DSW विपिन ध्यानी का आधिकारिक बयान:
“कॉन्ट्रेक्टर की फूड सर्विस को निलंबित कर दिया है। इसी के साथ एक जांच समिति बनी है, समिति अपनी जांच कर रही है। जैसे ही हमें बच्चों की तबियत का पता चला तो पूरा स्टाफ उनकी देखभाल में जुट गया था। प्राथमिक उपचार के बाद सभी बच्चे सुरक्षित अपने हॉस्टल में आ गए थे।”*

‘uksamachar’ की पैनी नजर: केवल सस्पेंशन या खानापूर्ति?
भले ही विवि प्रशासन अब खुद को छात्रों का हितैषी दिखाने के लिए ‘स्टाफ द्वारा देखभाल’ और ‘प्राथमिक उपचार’ की बात कर रहा हो, लेकिन सवाल वहीं खड़ा है: आखिर दो बार खाने में कीड़े निकलने के बावजूद इसी कॉन्ट्रैक्टर को बार-बार मौका क्यों दिया जा रहा था?

यह सस्पेंशन और जांच कमेटी का गठन ‘यूकेसमाचार (uksamachar)’ के उन तीखे सवालों की जीत है जिसने सीधे राजभवन और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को चुनौती दी थी। अब देखना यह होगा कि जांच समिति इस भ्रष्टाचार के असली संरक्षकों (अधिकारियों) के नाम उजागर करती है या इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। ‘यूकेसमाचार’ (uksamachar) की नजर इस जांच की हर एक फाइल पर बनी रहेगी।

लेकिन अभी भी एक सवाल जो खड़ा होता ही है कि भले ही यूकेसमाचार (uksamachar) सहित लगभग सभी मीडिया हाउसों के द्वारा सामने लाई गई uksamachar की खबर में उठाए सवालों के बाद के बाद सस्पेंशन तो हो गया, पर इस माफिया को पालने वाले अधिकारियों पर एक्शन कब होगा? यूकेसमाचार (uksamachar) की इस बड़ी जीत के लिए उत्तराखंड के जागरूक पाठकों को बधाई!

यह भी समझ लें कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, जब तक दोषियों को जेल नहीं होती, हमारी कलम रुकने वाली नहीं है!

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