कांग्रेस लीडरशिप और विधायक उमेश कुमार को कैसे गुगली से क्लीन बोल्ड करने की तैयारी में हैं हरीश रावत
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कांग्रेस के लिए परीक्षा बन सकती है ये सीट?
उत्तराखंड की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हरिद्वार की खानपुर सीट को लेकर सियासी दिलचस्पी बढ़ने लगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस सीट से चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा पर अटल दिख रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि खानपुर के लोग उनसे चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं और विपरीत हालातों में भी उनके साथ खड़े रहे हैं। लेकिन, इस पूरे बयान में सबसे दिलचस्प बात वह है, जो हरीश रावत अपनी चुनावी इच्छा जाहिर करने के बाद कहते हैं कि आखिरी फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लेगा यानी इच्छा भी जाहिर कर दी और अंतिम फैसले की गुंजाइश भी खुली रखी। बात दिलचस्प यहां होती है जब खानपुर सीट से मौजूदा निर्दलीय विधायक उमेश कुमार इस पर बिफरते दिखते हैं। क्योंकि रावत से अदावत उनकी पुरानी जो है, मजा और दोगुना तब हो जाता है, जब प्रणव चैंपियन ने भी खुलेआम इस सीट के साथ ही लक्सर से भी यह चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हल्द्वानी में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि हरिद्वार के लोग एक बार फिर पूरी शिद्दत से उनके साथ खड़े होना चाहते हैं। उनके मुताबिक, वहां के लोगों ने उन्हें बड़ी ताकत दी है और सबसे विपरीत परिस्थितियों में भी उनका साथ नहीं छोड़ा।
उन्होंने कहा कि खानपुर के लोगों की इच्छा है कि वह एक बार फिर उनके साथ खड़े हों। इसी वजह से वहां के लोग उनसे चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं। उनके बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि खानपुर उनके लिए महज एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि वहां के लोगों से जुड़ाव और राजनीतिक संभावनाओं का भी सवाल है।
हरीश रावत की नजर उमेश कुमार की सीट पर?
खानपुर विधानसभा सीट उत्तराखंड की उन सीटों में शामिल है, जिस पर 2027 के चुनाव में राजनीतिक दलों, नेताओं के साथ ही प्रदेश की जनता की भी नजर रहेगी। इस सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार जुड़े हैं। हरीश रावत की ओर से यहां से फिर चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर किए जाने के बाद सियासी चर्चाओं को नया आधार मिल गया है।
अगर कांग्रेस इस सीट पर हरीश रावत को उम्मीदवार बनाती है, तो उन्हें निर्दलीय विधायक उमेश कुमार की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में खानपुर में मुकाबला केवल दो नेताओं के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कांग्रेस की रणनीति, लोकल समीकरण और मतदाताओं के रुख की भी परीक्षा होगी। हालांकि, अभी न तो हरीश रावत की उम्मीदवारी तय है और न ही उनके सामने संभावित उम्मीदवारों को लेकर कोई अंतिम तस्वीर सामने आई है।
पत्रकार ने पूछा- मन खानपुर की तरफ है?
बातचीत के दौरान एक पत्रकार ने हरीश रावत से कहा कि उनका मन खानपुर की तरफ कर रहा है। इस पर रावत ने मुस्कुराते हुए तत्काल जवाब दिया, ‘मन है, मन तो मन ही है.’ उनका यह छोटा-सा जवाब पूरे बयान का सबसे दिलचस्प हिस्सा बन गया।
खानपुर पर रहेगी 2027 में नजर
हरीश रावत के बयान के बाद अब निगाहें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर है. क्या पार्टी उन्हें खानपुर से चुनाव लड़ने का मौका देगी? क्या वह किसी दूसरी सीट से मैदान में उतरेंगे? या फिर पार्टी उन्हें चुनाव में कोई दूसरी भूमिका सौंपेगी ये देखना अहम होगा। अहम ये भी होगा कि उमेश कुमार किस पार्टी में शामिल होकर यहां का चुनाव लड़ेंगे. उधर प्रणव चैंपियन भी मैदान में उतरते हैं, तो ये राज्य की हॉट सीट बन जाएगी।
