Chamoli Tunnel Landslide: आठ माह में दूसरा हादसा
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फिर परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े
विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में बृहस्पतिवार रात पानी और मलबा आने से हुए हादसे ने एक बार फिर परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब तीन किलोमीटर लंबी सुरंग में यह पहली दुर्घटना नहीं है। आठ महीने पहले दिसंबर 2025 में भी सुरंग के भीतर दो लोको ट्रॉली आपस में टकरा गई थीं। हादसे में कई मजदूर घायल हुए थे।
गुरुवार शाम गुरुवार शाम इस हादसे में उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी इलाके में HCC की साइट पर निर्माणाधीन DRT टनल धंसने से 7 मजदूरों की मौत हो गई है। हालांकि 18 मजदूरों का रेस्क्यू कर लिया गया है और बाकि लोगों की तलाश जारी है। दरअसल गुरुवार शाम करीब 7 बजे हाइड्रो प्रोजेक्ट की टनल के अंदर एक कैविटी से अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी बाहर आ गया और अंदर काम कर रहे मजदूर फंस गए। हादसे की जानकारी मिलते ही मौके पर SDRF, NDRF, ज़िला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें पहुंची व रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अधिकारियों के मुताबिक टनल के अंदर 22 लोग फंसे थे जिनमें से 18 को निकाल लिया गया है।
हादसा हुआ कैसे?
हादसा गुरुवार शाम करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच हुआ जहां टनल के लगभग 1.8 किलोमीटर अंदर एक कैविटी से अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी बाहर आ गया। टनल के गेट से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर ये मलबा और पानी आने से काम कर रहे मजदूर फंस गए जिसके बाद से टीमें रेस्क्यू में जुटी हुई हैं।
जलविद्युत परियोजना की क्षमता 444 मेगावाट है और परियोजना का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। ऐसे में लगातार दूसरी दुर्घटना होना चिंता का विषय है। सुरंग के भीतर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि परियोजना का संचालन कर रही टीएचडीसी ने मौजूदा घटना को भूगर्भीय आपदा बताया है। परियोजना प्रबंधन का कहना है कि अचानक पानी और मलबा आने की वजह से यह स्थिति बनी। प्रबंधन ने राहत एवं बचाव कार्य में सभी उपलब्ध संसाधनों को लगाया है।
इस जवाब से यह सवाल खड़ा होता है कि क्या सुरंग निर्माण के दौरान संभावित भूगर्भीय जोखिमों का पर्याप्त आकलन किया गया, क्या श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का पालन हो रहा और दिसंबर में हुई दुर्घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में किए गए जरूरी बदलाव लागू किए गए हैं।
