July 3, 2026

Ajab Gajab Uttarakhand: मृतक को जिंदा कर दूसरी बार कर दिया तबादला, पढ़ें हैरान करने वाला मामला

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Uttarkashi PWD
  • रिकॉर्ड तीन बार सूचना देने के बावजूद विभाग ने नहीं सुधरे

उत्तराखंड में चुनाव 2027 नजदीक आने के साथ ही सरकार ही नहीं विभागों की अजब गजब कार्यप्रणाली शुरु हो गई है। इसी के तहत एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसे जानकर सबके होश उड़े हुए हैं साथ ही विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं…

दरअसल लोक निर्माण विभाग की ओर से एक जुलाई को जारी की स्थानांतरण सूची में एक ऐसे कनिष्ठ सहायक का भी तबादला कर दिया, जो 2024 में ही दिवंगत हो चुका है। खास बात ये है कि यह पहली बार न होकर कर्मचारी सुरेंद्र सिंह का मृत्यु के बाद लगातार दूसरी बार स्थानांतरण आदेश है, इससे पहले उनका स्थानांतरण 2025 में भी दिखाया गया था। जबकि इनका निधन 28 अप्रैल 2024 को हो चुका है। वर्तमान की इस तबादला सूची के क्रमांक-37 में सुरेंद्र सिंह का स्थानांतरण निर्माण खंड, थराली से प्रांतीय खंड, रुद्रपुर दर्शाया गया है।

अजब- गजब लापरवाही
यह पूरी स्थिति भी तब हो रही है जब उनकी धर्मपत्नी को उनके निधन के बाद निर्माण खंड, गैरसैंण में मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति भी मिल चुकी है। इसमें भी सबसे हैरानी की बात तो ये है कि संबंधित कार्यालय ने विभागाध्यक्ष कार्यालय को तीन बार सुरेंद्र सिंह के निधन की सूचना लिखित में भेजी थी। इसके अलावा कई बार मौखिक रूप से भी अवगत कराया गया था।

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लापरवाही का आलम ये है कि इन सूचनाओं के बावजूद विभागीय अभिलेखों को अद्यतन नहीं किया गया। ऐसे में जानकारों का मानना है कि ये मात्र एक त्रुटि नहीं, बल्कि यह स्थिति अभिलेखों के रखरखाव पर गंभीर सवाल उठाती है। बताते चलें इससे पहले भी वर्ष 2025 की स्थानांतरण सूची में भी सुरेंद्र सिंह का स्थानांतरण थराली से हल्द्वानी दर्शाया गया था। ऐसे में लगातार 2 वर्ष भी दिवंगत कर्मचारी का सूची में नाम आना गंभीर लापरवाही की स्थिति है।

घोर उदासीनता का प्रत्यक्ष उदाहरण…
वहीं उत्तरांचल लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के प्रांतीय महामंत्री आनंद सिंह पुजारी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर उदासीनता का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया। पुजारी ने कहा कि कई बार सूचना देने के बाद भी नाम सूची में आना विभाग की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की जा रही है।

मांग: उच्चस्तरीय जांच की 
आनंद सिंह पुजारी ने कहा कि विभाग सेवा अभिलेख भी सही से अद्यतन नहीं रख पा रहा है। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर संदेह होता है। एसोसिएशन ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग की है। भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।

वहीं इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के एसओडी आरसी शर्मा का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं हैं। डिविजनाें से एचआरएम के जरिए हमारे पास कर्मचारियों की जानकारी आती है। इसमें यदि किसी कारण त्रुटि रह गई है तो उसे संसोधित करा दिया जाएगा।

सवाल तो उठता ही है : जवाब कौन देगा

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल तो ये ही है कि यदि विभाग के पास दिवंगत कर्मचारी को लेकर जानकारी ही अब तक अपडेट नहीं है। तो विभाग ने उनकी धर्मपत्नी को किस आधार पर मृतक आश्रित के रूप में नियुक्ति भी मिल चुकी है।

ऐसे में या तो विभाग के पास इस संबंध में पहले से जानकारी थी, लेकिन जानबुझकर किसी अपने को बचाने के लिए विभाग की ओर से ये त्रुटि की गई ताकि किसी अपने खास को मन चाही जगह पर पोस्टिंग दी जा सके।

या फिर अगर विभाग के पास ये जानकारी ही अपडेट नहीं थी कि कर्मचारी दिवंगत हो चुका है तो किस भ्रष्टाचार के तहत मृतक की धर्मपत्नी को बिना किसी जानकारी के किस आधार पर आश्रित के रूप में नियुक्ति दी गई।

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