केदारनाथ जाने का समय घटेगा: रोपवे के बाद अब सुरंग की तैयारी

केदारनाथ धाम की यात्रा को आसान, सुरक्षित और तेज बनाने के लिए केंद्र सरकार एक नई 7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की तैयारी में है। यह प्रस्तावित सुरंग
उत्तराखंड के कालीमठ घाटी में चौमासी को सोनप्रयाग से जोड़ेगी, जहां से केदारनाथ धाम तक जाने वाली रोपवे सेवा शुरू होगी…
कैसे मददगार होगी यह सुरंग?
प्रस्तावित सुरंग ट्विन-ट्यूब संरचना की होगी, जिससे यह न सिर्फ सोनप्रयाग तक पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग बनेगी, बल्कि आपातकालीन स्थिति में राहत-बचाव कार्य के रास्ते के तौर पर भी काम करेगी। खराब मौसम, भूस्खलन या अन्य आपदाओं के दौरान यह सुरंग यात्रियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती है। यह क्षेत्र दुर्गम भू-भाग और अचानक बदलने वाले मौसम के लिए जाना जाता है।
पैदल यात्रियों के लिए विशेष
सरकार चौमासी की ओर से केदारनाथ धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक वॉकवे और पैदल सुरंग के निर्माण की संभावनाओं का भी अध्ययन करेगी। इससे पैदल यात्रियों को अधिक
सुरक्षित और सुविधाजनक मार्ग मिल सकेगा।
मौजूदा मार्ग और सड़क चौड़ीकरण की योजना
फिलहाल सोनप्रयाग-गौरीकुंड जाने वाले वाहन एनएच-107 का उपयोग करते हैं। नई योजना के तहत कालीमठ घाटी में स्थित एक लेन वाली सड़क को दो लेन में बदला जाएगा। यह सड़क उत्तराखंड सरकार के अधीन है।
बन रहा है रोपवे
केंद्र सरकार ने 12.9 किलोमीटर लंबे सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट का ठेका अदाणी एंटरप्राइजेज को सौंपा है। यह रोपवे 2031-32 तक चालू होने की संभावना है। इसकी क्षमता प्रति घंटे 1,800 श्रद्धालुओं को ले जाने की होगी। 40 मिनट में एक तरफ की यात्रा पूरी हो सकेगी।
क्यों? परियोजना की जरूरत
17.7 लाख श्रद्धालु पहुंचे पिछले वर्ष केदारनाथ, 2030 तक यह संख्या 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2040 तक करीब 40 लाख श्रद्धालु केदारनाथ आ सकते हैं भीड़ को देखते हुए बुनियादी ढांचा विकसित करना समय की मांग है।
