डॉक्टर ने की आत्महत्या: बूंद-बूंद रिसती रही जिंदगी; कार में बोतल लटकाकर भरे इंजेक्शन
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घर की थी इकलौती बेटी

Female Doctor’s Suicide : देहरादून में एक युवा डॉक्टर तन्वी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने सभी को झकझोर दिया। एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज की महिला पीजी डॉक्टर नेत्र रोग विभाग में एमएस तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रही थीं।
मृतका के पिता ललित मोहन अंबाला में रहते हैं। उनके अनुसार बेटी तन्वी मंगलवार रात करीब नौ बजे श्रीमहंत इन्दिरेश अस्पताल में भर्ती मरीजों को देखने के लिए निकली थीं। उन्होंने बेटी से एक घंटे तक बात की। इसके बाद करीब 11.15 बजे बेटी ने अपनी मां को मैसेज कर बताया कि वह एक-डेढ़ घंटे देरी से घर आएगी। उन्होंने इसकी सूचना तन्वी के पिता ललित को दी।
उन्हें यह बात अजीब लगी ललित मोहन को उनकी बेटी ने पहली बार मैसेज कर इस तरह की जानकारी दी। ऐसे में उन्होंने फौरन बेटी को फोन किया लेकिन, फोन नहीं उठा। उन्होंने मैसेज किए फिर इसके बाद करीब सात बार कॉल किया। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इससे घबराकर वे रात करीब 11.45 बजे अंबाला से देहरादून के लिए निकल गए।
इसके अलावा पिता ललित मोहन ने बताया कि बेटी ने फोन पर मानसिक रूप से परेशान होने की बातें कहीं। कहा कि अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। आप अंबाला से देहरादून आ जाओ। अब एचओडी की शिकायत करेंगे। उन्होंने बेटी को अगले दिन देहरादून आने का भरोसा दिलाया था।
सीओ सदर अंकित कंडारी के मुताबिक अंबाला निवासी डॉ. तन्वी देहराखास में मां के साथ रहती थीं। मंगलवार रात उनकी नाइट ड्यूटी थी। तन्वी ने रात 11:30 बजे मां को मैसेज किया कि वह 12:30 बजे तक घर पहुंच जाएंगी। पिता ललित मोहन देहरादून पहुंचने पर करीब 2 बजे अपनी पत्नी को साथ लेकर बेटी को ढूंढने निकल गए। अस्पताल से कारगी की तरफ शनि मंदिर के आगे उनकी बेटी की कार सड़क किनारे खड़ी थी।
उन्होंने अंदर देखा तो बेटी मरणासन स्थिति में सीट पर पड़ी हुई थी। पहले वे चिल्लाए और पत्थर उठाकर शीशा तोड़ा और बेटी को गोद में उठाकर अपनी कार में बैठाया और अस्पताल लेकर गए जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। दूसरी तरफ सीट पर चार इंजेक्शन के खाली बॉयल पड़े थे और ऊपर लगी बोतल पूरी खत्म हो चुकी थी।
जिंदगी: बूंद-बूंद रिसती रही
डॉ. तन्वी ने कार की ड्राइविंग सीट पर बैठकर ऊपर हैंडल से 100 एमएल की बोतल लटकाकर उसमें पोटेशियम क्लोराइड (केसीएल) के करीब चार इंजेक्शन भरे और दाहिने हाथ में लगी कैनुला से जोड़ दिया। कई घंटे तक एक-एक बूंद उनके शरीर में जाती रही और इंजेक्शन की मात्र ओवरडोज होने पर उनकी सांसें धीमी पड़ती गईं। कोई देखकर उन्हें अस्पताल पहुंचाता इससे पहले ही उनकी मौत हो गई।
जहरीला इंजेक्शन लगाकर एक महिला पीजी डॉक्टर ने खुदकुशी कर ली। आत्महतया करने वाली डॉ. तन्वी बेहद मानसिक तनाव में थी। पुलिस की प्रारंभिक तफ्तीश में पता चला है कि वह पहले भी दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुकी थी। बेटी की इसी मानसिक स्थिति को देखते हुए उसकी मां उसके साथ देहरादून के देहराखास में किराये के कमरे में रह रही थीं।
तन्वी: इकलौती बेटी थी
बेटी के जाने से बदहवास पिता ने रो-रोकर बताया कि तन्वी उनकी इकलौती बेटी थी। एक बेटा है जो अंबाला में एमबीबीएस कर रहा है। वह अपने बैच में सबसे कम उम्र की डॉक्टर थी। उसका सपना बड़ा डॉक्टर बनने का था लेकिन अब सभी सपने खत्म हो गए।
फॉरेसिंक विशेषज्ञ भी हैरान
डॉक्टर की आत्महत्या के तरीके से पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी हैरान हैं। पुलिस के अनुसार तन्वी ने पहले हाथ में कैनुला लगाया और फिर जहरीला इंजेक्शन अपनी नसों में उतार लिया। दवा इतनी घातक थी कि चंद पलों में उसकी जान चली गई। मेडिकल प्रशिक्षित डॉक्टर होने के नाते तन्वी को मानव शरीर और दवाओं की गहरी समझ थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर हर एंगल से तफ्तीश शुरू कर दी है।
हमला: नर्वस सिस्टम पर
मेडिकल के जानकारों का मानना है कि उसने ऐसी घातक दवा का चुनाव किया जिसका सीधा असर नर्वस सिस्टम या हृदय गति पर होता है। खून में दवा पहुंचने से उसकी जान चली गई। सीओ सदर अंकित कंडारी ने बताया कि फोरेंसिक टीम ने सुबूत जुटाए हैं। इधर, मुख्य जन संपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी के मुताबिक पता चला है कि डॉ. तन्वी मानसिक रोग का उपचार ले रही थीं। उन्होंने दो वर्ष पूर्व भी आत्महत्या का प्रयास किया था। परिजन तन्वी का उपचार करा रहे थे। तन्वी की मानसिक बीमारी की लिखित सहमति अभिभावकों ने एमएस ऑफिस में जमा की है।
केसीएल इंजेक्शन: शरीर में पोटेशियम की मात्रा घटने पर लगता है
देहरादून के एक वरिष्ठ फिजिशियन के मुताबिक पोटेशियम क्लोराइड (केसीएल) इंजेक्शन उन मरीजों को दिया जाता है जिनके शरीर में पोटेशियम की मात्रा कम हो जाती है। अगर शरीर में इसकी अधिक मात्रा चली जाए तो इससे हाइपर कैलीमिया हो सकता है। यह स्थिति शरीर में पोटेशियम की बढ़ी हुई मात्रा को दर्शाता है। इससे मरीज को ऐरेज्मिया का खतरा बढ़ जाता है। जो दिल की धड़कनों को असामान्य कर देता है। इससे मरीज की मौत हो सकती है। अगर डॉ. तन्वी के मामले की बात करें तो वे स्वयं डॉक्टर थीं। ऐसे में वे जानती थीं कि आत्महत्या के लिए कौन सा इंजेक्शन बेहतर रहेगा।
आरोप: उत्पीड़न का लगाया था
मृतक के परिजनों ने नेत्र रोग विभाग की एचओडी डॉ. प्रियंका गुप्ता पर बेटी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का सीधा आरोप लगाया है। परिजनों के अनुसार, तन्वी ने कई बार उन्हें इस उत्पीड़न के बारे में रोते हुए बताया था। सीओ सदर अंकित कंडारी के अनुसार, परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस आरोपी एचओडी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपों की गंभीरता से जांच की जाएगी।
