Chamoli samachar: इंतजार हुआ खत्म, रंग-बिरंगे फूल बिखेर रहे रंगत
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पर्यटकों के लिए खुली विश्व धरोहर फूलों की घाटी
Valley of Flowers Uttarakhand: पर्यटकों के लिए आज एक जून को विश्व धरोहर फूलों की घाटी खोल दी गई है। घाटी में रंग-बिरंगे फूल रंगत बिखेर रहे हैं। घाटी में करीब दो दर्जन से अधिक प्रजाति के फूल खिल चुके हैं। दरअसल प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आज से खुल गई विश्व धरोहर फूलों की घाटी, यात्रा मजिस्ट्रेट राहुल शाह ने रिबन काट कर किया यात्रा का शुभारंभ।
आज सोमवार सुबह फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क के मुख्य गेट पर पार्क प्रबन्धन द्वारा रेंज ऑफिसर गौरव नेगी की उपस्थिति में द्वार पूजन के बाद यात्रा मजिस्ट्रेट हेमकुंट साहिब राहुल शाह द्वारा रिबन काटकर फूलों की घाटी यात्रा का शुभारंभ किया गया। आज पहले दिन सुबह 10 बजे तक बड़े उत्साह से घाटी में 30 प्रकृति प्रेमी पर्यटकों का पहला दल सभी औपचारिकताएं पूरी कर घाटी का दीदार करने पहुंचा। पार्क ऑफिसियल भी इस अवसर पर घाटी का जायजा लेने पर्यटकों के साथ फूलों की घाटी रवाना हुआ।फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क के पैदल मार्ग पर अभी भी जमी है बर्फ।

यह दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों से समृद्ध घाटी जैव विविधता का अनुपम खजाना है। यहां 500 से अधिक प्रजाति के रंग बिरंगे फूल खिलते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए फूलों की घाटी से टिपरा ग्लेशियर, रताबन चोटी, गौरी और नीलगिरी पर्वत के विहंगम नजारे भी देखने को मिलते है। फूलों की घाटी 30 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहेगी। नंद कानन के उप वन संरक्षक, बीबी मर्तोलिया ने बताया कि पर्यटकों का पहला दल एक जून को घांघरिया बेस कैंप से रवाना किया जाएगा। पर्यटकों को फूलों की घाटी का ट्रैक करने के बाद उसी दिन बेस कैंप घांघरिया वापस आना होगा। जहां उनके ठहरने की समुचित व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि वैली ऑफ फ्लावर ट्रैकिंग के लिए देशी नागरिकों को 200 रुपए तथा विदेशी नागरिकों के लिए 800 रुपए ईको ट्रेक शुल्क निर्धारित किया गया है। ट्रैक को सुगम और सुविधाजनक बनाया गया है।
कई दुर्लभ फूलों की प्रजातियां
यह घाटी अल्पाइन फूलों की आकर्षक घास के मैदानों, वनस्पतियों और जीवों की समृद्धि और बर्फ से ढकी चोटियों के मनोरम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। फूलों की घाटी में एनीमोन्स, जेरेनियम, मार्श मैरीगोल्ड्स, प्रिमुलस, एस्टर, ब्लू पॉपी, कोबरा लिली, ब्लूबेल, ब्रह्म कमल आदि फूलों की 500 से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं। यूरोपियन लेखक और प्रकृति के यायावर फ्रेंक स्माइथ ने ‘वेली आफ फ्लावर’ के शीर्षक से भारत के हिमालय में स्थित फूलों के अदभुत संसार पर एक पुस्तक लिखी। जिसके बाद दुनिया की नजर फूलों की पर गया।

उत्तराखंड के चमोली जिले में फूलों की घाटी को उसकी प्राकृतिक खूबसूरती और जैविक विविधता के कारण 2005 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया। 87.5 वर्ग किमी में फैली फूलों की ये मनमोहक और सुन्दर घाटी न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। बृहस्पतिवार को आज प्रकृति प्रेमियों और आम पर्यटकों के लिए उत्तराखंड के उच्च हिमालई लोकपाल क्षेत्र में स्थित विश्व प्राकृतिक धरोहर फूलों की घाटी देशी – विदेशी पर्यटकों के दीदार के लिए खोल दी गई है। इस वर्ष प्रकृति प्रेमियों को यहां फूलों के साथसाथ बर्फ और हिमखंडों के भी अद्भुत नजारे दिखने को मिलेंगे।
जैव विविधता से भरपूर
फूलों की यह घाटी जैव विविधता से भरपूर है। यहां कई प्रजाति की तितलियां और परिंदो को देख सकते हैं। इसके अलावा यहा नीली भेड़, कस्तूरी मृग, काले/भूरे भालू, हिम तेंदुए और कई अन्य प्रजातियों के पशु पक्षियों को देखा जा सकता है।
विश्व धरोहर 2004 में चुना गया
आमतौर पर जगह को नंदन कानन हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ है भगवान इंद्र का बगीचा। 1980 में भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया और बाद में 1982 में इसका नाम बदलकर नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान कर दिया गया और यह नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के मुख्य भाग के अंतर्गत आ गया। 2004 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया।
धार्मिक महत्व
शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, यही वह प्राकृतिक सौंदर्य तथा फूलों एवं वनाषौधियों का क्षेत्र है, जिसे नन्द कानन वन कहा जाता है। बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन उनियाल बताते हैं कि इस नन्द कानन वन में देवता निवास करते हैं।
