September 20, 2026

घर में शेर, पर वर्ल्ड कप में ढेर! श्रीलंका बाहर और अब भारत पर संकट; क्या मेजबान होना ही सबसे बड़ी हार है?

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नई दिल्ली। क्रिकेट की दुनिया में एक कहावत है कि अपने घर में खेलना सबसे बड़ा फायदा होता है। अपनी पिच, अपनी मिट्टी और अपने दर्शकों का शोर किसी भी टीम के लिए ’12वें खिलाड़ी’ का काम करता है। लेकिन जब बात टी20 वर्ल्ड कप की आती है, तो यह ‘एडवांटेज’ एक भयानक ‘श्राप’ या ‘पनौती’ में तब्दील होता नजर आता है। इतिहास गवाह है कि 2007 से लेकर अब तक, जिस भी देश ने इस छोटे फॉर्मेट के महाकुंभ की मेजबानी की है, उसके हाथों से ट्रॉफी फिसल गई है। साल 2026 में एक बार फिर भारत और श्रीलंका संयुक्त रूप से इस टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहे हैं, और शुरुआती संकेतों ने प्रशंसकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। श्रीलंका पहले ही टूर्नामेंट से बाहर होकर इस ‘मिथक’ को सच साबित कर चुका है, और अब करोड़ों भारतीय फैंस की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या टीम इंडिया इस ऐतिहासिक बाधा को पार कर पाएगी या वह भी इस ‘मेजबान के श्राप’ का शिकार बनेगी।

टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास के पन्ने पलटें तो तस्वीर काफी डरावनी नजर आती है। साल 2007 में जब इस टूर्नामेंट का आगाज साउथ अफ्रीका में हुआ, तो प्रोटियाज टीम अपने ही घर में सुपर-8 से बाहर हो गई। इसके बाद 2009 में क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इंग्लैंड और 2010 में कैरेबियाई धरती पर वेस्टइंडीज भी अपनी मेजबानी का फायदा नहीं उठा पाए और सेमीफाइनल तक का सफर तय करने में नाकाम रहे। 2012 में पहली बार ऐसा लगा कि श्रीलंका इस ‘जिंक्स’ को तोड़ देगा। लंकाई टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन खिताबी मुकाबले में वेस्टइंडीज ने उन्हें 36 रनों से हराकर करोड़ों फैंस का दिल तोड़ दिया। श्रीलंका इकलौती ऐसी टीम बनी जो मेजबान होते हुए फाइनल तक का सफर तय कर सकी, लेकिन जीत वहां भी नसीब नहीं हुई।

इसके बाद का इतिहास भी कमोबेश ऐसा ही रहा। 2014 में बांग्लादेश सुपर-10 से आगे नहीं बढ़ पाया, तो वहीं 2016 में जब भारत में टी20 वर्ल्ड कप हुआ, तब टीम इंडिया का सपना सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज ने ही चकनाचूर किया। 2021 में यूएई और ओमान ग्रुप स्टेज से बाहर हुए, और 2022 के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया अपने ही घर में सुपर-12 की बाधा पार नहीं कर सके। यहां तक कि 2024 में यूएसए और वेस्टइंडीज की संयुक्त मेजबानी भी इस सिलसिले को नहीं बदल सकी; भारत ने वहां खिताब जीता लेकिन दोनों मेजबान सुपर-8 में ही सिमट गए।

अब सवाल 2026 का है। श्रीलंका की विदाई ने यह साफ कर दिया है कि घरेलू परिस्थितियों का दबाव कभी-कभी प्रतिभा पर भारी पड़ जाता है। भारत के पास दुनिया की सबसे मजबूत टीम और आईपीएल जैसा अनुभव है, लेकिन आंकड़ों का यह भूत रह-रहकर डरा रहा है। क्या रोहित ब्रिगेड या टीम इंडिया की नई पीढ़ी उस मानसिक दीवार को गिरा पाएगी जिसे पिछले 9 एडिशन में कोई पार नहीं कर पाया? क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, लेकिन ‘मेजबानी की पनौती’ एक ऐसा कड़वा सच बन चुका है जिसे झुठलाने के लिए भारत को न केवल विरोधी टीमों से, बल्कि इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड से भी लड़ना होगा।

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