विदेशी सरजमीं पर लगातार सीरीज गंवाने के बाद बैकफुट पर भारतीय क्रिकेट टीम: 'ऑल इज वेल' के दावे के बीच बोर्ड और मुख्य कोच के फैसलों पर तीखी बहस
नई दिल्ली। विदेशी सरजमीं पर भारतीय क्रिकेट टीम के हालिया निराशाजनक प्रदर्शन ने खेल प्रेमियों और खेल विश्लेषकों को चिंता में डाल दिया है। आयरलैंड के खिलाफ मिली झटकों भरी हार के बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टी20 और वनडे सीरीज में भारतीय टीम को पराजय का सामना करना पड़ा है। लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई का रवैया बेहद शांत नजर आ रहा है। बोर्ड की ओर से दिए जा रहे ‘ऑल इज वेल’ के बयानों पर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर टीम प्रबंधन और मुख्य कोच से इस हार का हिसाब कब मांगा जाएगा।
भारतीय टीम का हालिया विदेशी दौरा कई मोर्चों पर कमजोरियों को उजागर कर चुका है। आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली टीम के खिलाफ उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाना और फिर इंग्लैंड की मजबूत टीम के सामने पूरी तरह पस्त हो जाना, भारतीय क्रिकेट के गिरते स्तर की ओर इशारा करता है। विशेषकर इंग्लैंड दौरे पर खेली गई टी20 और वनडे सीरीज में न तो भारतीय बल्लेबाजी में गहराई दिखी और न ही गेंदबाजी आक्रमण में वह धार नजर आई, जिसके लिए भारतीय टीम जानी जाती है। महत्वपूर्ण मौकों पर टीम के सीनियर और युवा खिलाड़ियों दोनों ने ही निराश किया है।
टीम प्रबंधन के फैसलों और रणनीति पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं। मुख्य कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल में टीम के रणनीतिक बदलावों को लेकर तीखी आलोचना हो रही है। प्लेयिंग इलेवन के चयन में लगातार किए जा रहे प्रयोग, खिलाड़ियों के बल्लेबाजी क्रम में बार-बार बदलाव और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को नजरअंदाज करने की नीति टीम के संतुलन को बिगाड़ रही है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि मैदान पर सही समय पर सही फैसले न ले पाने के कारण टीम को बार-बार हार का मुंह देखना पड़ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली बात बीसीसीआई का रुख है। अमूमन किसी बड़े दौरे पर हार के बाद बोर्ड सख्त रुख अपनाता है और समीक्षा बैठकें आयोजित करता है, लेकिन इस बार बोर्ड की ओर से सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश की जा रही है। बोर्ड के अधिकारियों की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। खेल जगत में यह चर्चा तेज है कि जब तक प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद करना बेमानी होगा।
भारतीय टीम के इस लचर प्रदर्शन से प्रशंसकों में भारी निराशा व्याप्त है। सोशल मीडिया से लेकर खेल के मंचों तक मुख्य कोच की कार्यप्रणाली और कप्तान के फैसलों की कड़ी समीक्षा की मांग की जा रही है। आगामी बड़ी प्रतियोगिताओं और दौरों को देखते हुए यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो भारतीय क्रिकेट को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या बीसीसीआई वाकई समीक्षा बैठक बुलाकर कड़े कदम उठाता है या फिर ‘ऑल इज वेल’ के आवरण में इन असफलताओं को ढका जाता रहेगा।
