हरभजन सिंह ने बताया जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बोले बच्चे को गोद में लेकर समझ आया असली खुशी का मतलब
बेटी के जन्म ने बदल दिया भज्जी का स्वभाव
हरभजन सिंह ने बातचीत में बताया कि क्रिकेट के मैदान पर उनका अंदाज हमेशा आक्रामक रहा। वह हर मुकाबले में जीत के लिए पूरी ताकत लगाते थे और बल्लेबाजों को आउट करने के लिए लगातार रणनीति बनाते रहते थे। मैदान के बाहर भी वह दोस्तों के साथ हंसी मजाक और मस्ती करने वाले इंसान रहे हैं। लेकिन पिता बनने के बाद उनकी जिंदगी में ऐसा बदलाव आया जिसने उन्हें भीतर से शांत कर दिया।
भज्जी ने बताया कि जब उनकी बेटी का जन्म हुआ तो उनके सोचने का तरीका बदल गया। उन्हें महसूस हुआ कि अब जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण चीज उनका परिवार है। उनकी बेटी बेटा पत्नी मां और बहनें ही उनकी दुनिया हैं। इसके आगे उन्हें पैसा शोहरत और दूसरी उपलब्धियां छोटी लगने लगीं। उनके मुताबिक एक छोटे से बच्चे को अपनी बाहों में थामने का अनुभव इंसान को जिंदगी की असली अहमियत समझा देता है।
पैसा और शोहरत नहीं परिवार है असली दौलत
हरभजन सिंह ने कहा कि इंसान अपने जीवन में पैसा कमाने और पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत करता है। सफलता हासिल करना जरूरी है लेकिन इसके लिए परिवार और रिश्तों को नजरअंदाज करना सही नहीं है। उन्होंने अपने अनुभव से बताया कि पैसा शोहरत और कामकाज जिंदगी के अस्थायी हिस्से हैं जबकि अपनों का साथ सबसे ज्यादा मायने रखता है।
उनकी यह बात उन लोगों के लिए भी एक संदेश है जो करियर और काम की भागदौड़ में परिवार को समय नहीं दे पाते। भज्जी का मानना है कि जीवन की असली खुशी उन रिश्तों में होती है जो मुश्किल समय में भी इंसान के साथ खड़े रहते हैं। पिता बनने के बाद उनके भीतर आया बदलाव इस बात का उदाहरण है कि परिवार की जिम्मेदारी इंसान को जिंदगी के प्रति नया नजरिया दे सकती है।
क्रिकेट के प्रति आज भी कायम है जुनून
हरभजन सिंह ने अपने क्रिकेट करियर के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें ऐसे दौर में खेलने का मौका मिला जब बल्ले और गेंद के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती थी। भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है और उनकी आक्रामक गेंदबाजी ने कई मौकों पर टीम को सफलता दिलाई।
उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लेजेंड्स यानी WCL में दोबारा मैदान पर उतरने के अनुभव को भी साझा किया। भज्जी ने माना कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर पहले जैसा साथ नहीं देता। घुटनों में भी पहले जैसी ताकत नहीं रही और मैदान पर खेलना पहले की तुलना में मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद क्रिकेट के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ है।
शरीर की उम्र बढ़ी लेकिन दिमाग आज भी युवा
हरभजन सिंह ने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब वह दोबारा मैदान पर उतरते हैं तो शरीर भले ही उम्र के अगले पड़ाव पर पहुंच चुका हो लेकिन उनका दिमाग आज भी 20 साल के युवा खिलाड़ी की तरह सोचता है। वह मैदान पर पहुंचते ही बल्लेबाज को आउट करने के तरीके तलाशने लगते हैं। उनका यह बयान बताता है कि क्रिकेट उनके लिए केवल पेशा नहीं बल्कि जुनून भी है।
हरभजन सिंह की इस बातचीत में जिंदगी के दो महत्वपूर्ण पहलू सामने आते हैं। एक तरफ क्रिकेट के प्रति उनका अटूट प्रेम है तो दूसरी तरफ परिवार के प्रति उनकी गहरी भावनाएं हैं। बेटी के जन्म ने उन्हें यह एहसास कराया कि असली सफलता केवल मैदान पर जीत हासिल करने या शोहरत कमाने में नहीं बल्कि अपनों के साथ खुशहाल जिंदगी जीने में है।
