भारत की झोली में एक और मेडल, लवप्रीत सिंह ने वेटलिफ्टिंग में किया कमाल
मुकाबले की शुरुआत से ही लवप्रीत सिंह शानदार लय में नजर आए। स्नैच स्पर्धा में उन्होंने अपने पहले प्रयास में 168 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 173 किलोग्राम का वजन भी आसानी से उठाकर अपनी दावेदारी मजबूत कर दी। तीसरे और अंतिम प्रयास में उन्होंने 176 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में बढ़त बना ली। इस प्रदर्शन के दम पर वह स्नैच में शीर्ष स्थान पर रहे और न्यूजीलैंड के डेविड लिटी पर 10 किलोग्राम की बढ़त हासिल कर चुके थे।
हालांकि असली मुकाबला क्लीन एंड जर्क में देखने को मिला। लवप्रीत ने पहले 205 किलोग्राम और फिर 212 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद उन्होंने स्वर्ण पदक पक्का करने के इरादे से 217 किलोग्राम की चुनौती ली, लेकिन अंतिम प्रयास सफल नहीं हो सका। दूसरी ओर डेविड लिटी ने शानदार वापसी करते हुए क्लीन एंड जर्क में 223 किलोग्राम वजन उठाया और कुल 389 किलोग्राम के साथ महज एक किलोग्राम की बढ़त बनाकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। लवप्रीत का कुल स्कोर 388 किलोग्राम रहा, जिसने उन्हें रजत पदक दिलाया।
पंजाब के अमृतसर जिले के बाल सचंदर गांव में 6 सितंबर 1997 को जन्मे लवप्रीत सिंह की सफलता संघर्ष और मेहनत की प्रेरक कहानी है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने वर्ष 2010 में महज 13 वर्ष की उम्र में वेटलिफ्टिंग शुरू की। स्थानीय कोचों के मार्गदर्शन में लगातार अभ्यास करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पंजाब का प्रतिनिधित्व किया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
साल 2017 में उन्हें पटियाला स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में जगह मिली, जहां उनकी प्रतिभा को और निखार मिला। शुरुआत में उन्होंने 105 किलोग्राम वर्ग में खेलते हुए जूनियर कॉमनवेल्थ और एशियाई जूनियर प्रतियोगिताओं में पदक जीते। बाद में अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग महासंघ द्वारा नई भार श्रेणियां लागू होने के बाद वह 109 किलोग्राम वर्ग में पहुंचे और वहां भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा।
लवप्रीत इससे पहले 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीत चुके हैं। इसके अलावा 2022 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतकर उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह भारत के सबसे भरोसेमंद वेटलिफ्टरों में शामिल हैं। भले ही इस बार गोल्ड उनसे सिर्फ एक किलोग्राम दूर रह गया, लेकिन उनका प्रदर्शन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया।
