September 9, 2026

कोच बनने का ऑफर आया तो पहले पत्नी से पूछेंगे नेहरा! टीम इंडिया की जिम्मेदारी पर बोले ऐसा काम आसान नहीं 3-4 साल टिकना भी मुश्किल

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नई दिल्ली। टीम इंडिया का हेड कोच बनना क्रिकेट की दुनिया में किसी भी खिलाड़ी या कोच के लिए बड़े सम्मान की बात मानी जाती है लेकिन पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के लिए यह जिम्मेदारी फिलहाल इतनी आसान नजर नहीं आती। टीम इंडिया के कोच पद को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने अपने खास मजाकिया अंदाज में ऐसा जवाब दिया कि वहां मौजूद लोग हंस पड़े। नेहरा ने कहा कि अगर उन्हें भारतीय टीम की कोचिंग संभालनी पड़ी तो सबसे पहले घर की हाई कमीशन यानी अपनी पत्नी से बात करनी होगी वरना तलाक हो सकता है। हालांकि उनका यह बयान मजाकिया अंदाज में था और इसके पीछे उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट की बेहद व्यस्त जिंदगी को बड़ी वजह बताया।

आशीष नेहरा को टीम इंडिया के अगले हेड कोच के संभावित दावेदारों में गिना जाता रहा है। इसकी बड़ी वजह आईपीएल में गुजरात टाइटन्स के साथ उनका शानदार कोचिंग रिकॉर्ड है। नेहरा ने 2022 में गुजरात टाइटन्स को उसके पहले ही सीजन में आईपीएल चैंपियन बनाया था। इसके बाद टीम ने 2023 और 2026 में भी फाइनल तक का सफर तय किया। इस प्रदर्शन ने नेहरा की कोच के तौर पर पहचान को और मजबूत किया है।

कोलकाता में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के सालाना अवॉर्ड समारोह के दौरान नेहरा से पूछा गया कि क्या वह भविष्य में भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच की जिम्मेदारी संभालना चाहेंगे। नेहरा ने साफ किया कि वह इस पद को लेकर अभी कोई योजना नहीं बना रहे हैं। उनके मुताबिक टीम इंडिया को कोचिंग देना निश्चित तौर पर बड़े सम्मान और गर्व की बात होगी लेकिन फिलहाल वह गुजरात टाइटन्स के साथ अपनी भूमिका में खुश हैं और उन्होंने इस जिम्मेदारी को अपनी महत्वाकांक्षा नहीं बनाया है।

इसके बाद नेहरा ने जिस अंदाज में अपनी पत्नी का जिक्र किया उसने पूरे बयान को मजेदार बना दिया। उन्होंने कहा कि अगर कभी टीम इंडिया के कोच पद का ऑफर आता है तो पहले पत्नी से बात करनी होगी। इसकी वजह भी उन्होंने खुद बताई। नेहरा के मुताबिक इंटरनेशनल क्रिकेट में कोच की नौकरी का मतलब साल के करीब आठ से नौ महीने तक लगातार यात्रा करना और परिवार से दूर रहना है। उनके मुताबिक यह काम सुनने में जितना आकर्षक लगता है असल में उतना ही चुनौतीपूर्ण है।

नेहरा ने यह भी बताया कि इंटरनेशनल क्रिकेट की कोचिंग में लगातार यात्रा दबाव और काम की मांग इतनी ज्यादा होती है कि बहुत कम कोच तीन या चार साल से ज्यादा समय तक इस भूमिका में टिक पाते हैं। यही वजह है कि वह इस पद को लेकर तुरंत कोई फैसला या योजना बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

नेहरा ने आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट की कोचिंग के बीच फर्क भी बताया। उनके मुताबिक आईपीएल में भी दबाव कम नहीं होता लेकिन नेशनल टीम को संभालने की जिम्मेदारी बिल्कुल अलग स्तर की होती है। राष्ट्रीय टीम का कोच सिर्फ एक फ्रेंचाइजी नहीं बल्कि पूरे देश की उम्मीदों के साथ जुड़ा होता है। लगातार दौरे मैचों का दबाव खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जिम्मेदारी और हर फैसले पर होने वाली आलोचना इस भूमिका को बेहद कठिन बना देती है।

फिलहाल नेहरा गुजरात टाइटन्स के साथ खुश हैं और टीम इंडिया के कोच पद का दरवाजा उन्होंने पूरी तरह बंद भी नहीं किया है। उनका कहना है कि भविष्य में अगर ऐसा मौका आता है तो उस समय परिस्थितियों को देखकर फैसला लिया जाएगा। यानी नेहरा ने कोच बनने से इनकार नहीं किया है लेकिन फिलहाल उनकी प्राथमिकता यही है कि वह अपनी मौजूदा भूमिका में पूरी तरह संतुष्ट हैं। उनका पत्नी वाला मजाक भले ही सुर्खियों में छा गया हो लेकिन इसके पीछे छिपी बात साफ है कि टीम इंडिया का कोच बनना सिर्फ क्रिकेट की रणनीति बनाने का काम नहीं बल्कि निजी जिंदगी से भी बड़ा समय और त्याग मांगने वाली जिम्मेदारी है।

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