July 30, 2026

अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा जानिए उनके करियर की पांच सबसे यादगार उपलब्धियां

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। शांत स्वभाव मजबूत तकनीक और मुश्किल परिस्थितियों में शानदार बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले रहाणे ने अपने करियर में कई ऐसी पारियां खेलीं जिन्होंने भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। टेस्ट क्रिकेट में संकटमोचक की भूमिका निभाने वाले इस बल्लेबाज ने कई बार टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला और अपनी कप्तानी से भी अलग पहचान बनाई। आइए जानते हैं उनके करियर की पांच सबसे बड़ी उपलब्धियां जिन्होंने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल किया।

साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेली गई 147 रन की पारी रहाणे के करियर की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। उस समय ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल जॉनसन रयान हैरिस जोश हेजलवुड और शेन वॉटसन बेहद खतरनाक लय में थे लेकिन रहाणे ने धैर्य और शानदार तकनीक का परिचय देते हुए 147 रन बनाए। विराट कोहली के साथ उनकी बड़ी साझेदारी ने भारत को हार से बचाया और मुकाबला ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई।

इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेला गया उनका शतक भी हमेशा याद रखा जाएगा। जब भारतीय टीम शुरुआती झटकों के बाद मुश्किल में थी तब रहाणे ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए 103 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत भारत सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा और बाद में मुकाबला जीतकर लॉर्ड्स में 28 साल बाद ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह पारी उनके धैर्य और जिम्मेदारी का शानदार उदाहरण बनी।

बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी 2020-21 में रहाणे की कप्तानी भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्यायों में शामिल है। एडिलेड टेस्ट में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद पूरी दुनिया ने भारतीय टीम को कमजोर माना था। विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शतक जड़ते हुए टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनकी शांत कप्तानी और आत्मविश्वास ने पूरी टीम का मनोबल बढ़ाया। भारत ने बाद में सीरीज 2-1 से जीतकर इतिहास रच दिया।

साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रहाणे ने टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक लगाने का अनोखा रिकॉर्ड बनाया। पहली पारी में उन्होंने 127 रन बनाए जबकि दूसरी पारी में नाबाद 100 रन की शानदार पारी खेली। वह पांचवें या उससे नीचे बल्लेबाजी क्रम पर उतरकर टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। यह उपलब्धि उनकी निरंतरता और बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन की गवाही देती है।

रहाणे की कप्तानी का रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा। उन्होंने भारत के लिए छह टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिनमें चार मुकाबलों में जीत मिली जबकि दो मैच ड्रॉ रहे। सबसे खास बात यह रही कि उनकी कप्तानी में भारतीय टीम को एक भी टेस्ट मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा। शांत नेतृत्व और खिलाड़ियों पर भरोसा रखने की उनकी शैली की क्रिकेट जगत में खूब सराहना हुई।

अजिंक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि धैर्य अनुशासन और टीम के लिए समर्पण किसी भी खिलाड़ी को महान बना सकता है। भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धियां प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

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