October 12, 2026

मध्यप्रदेश के सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए Zoho मेल अनिवार्य, 45 दिन लॉगिन नहीं करने पर बंद होगा ईमेल अकाउंट

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मध्यप्रदेश: सरकार ने सरकारी डिजिटल संचार व्यवस्था में बदलाव करते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्वदेशी ईमेल प्लेटफॉर्म जोहो का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी ईमेल व्यवस्था की सुरक्षा मजबूत करना, साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच के जोखिम को कम करना तथा विदेशी क्लाउड सेवाओं पर निर्भरता घटाना है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल संचार के लिए निर्धारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करना होगा। यह कदम सरकारी डिजिटल संचार प्रणाली को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया है। इसके माध्यम से सरकारी डेटा की सुरक्षा और ईमेल सेवाओं के संचालन पर नियंत्रण मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

इस व्यवस्था को लागू करने के संबंध में राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के बीच भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसके बाद सरकारी ईमेल सेवाओं के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए। नई व्यवस्था केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और एनआईसी से जुड़े राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत सरकारी डिजिटल संचार को सुरक्षित बनाने के प्रयासों से संबंधित है। इसके अंतर्गत राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल के लिए निर्धारित जोहो प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना होगा। सरकार की इस पहल में साइबर सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल सेवाओं को स्वदेशी तकनीकी ढांचे के माध्यम से संचालित करने पर भी ध्यान दिया गया है।

नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपनी आधिकारिक ईमेल आईडी का इस्तेमाल महीने में कम से कम एक बार करना होगा। यदि कोई यूजर लगातार 45 दिनों तक अपने ईमेल इनबॉक्स में लॉगिन नहीं करता है, तो सुरक्षा कारणों से उसका ईमेल खाता स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा। इस प्रावधान का उद्देश्य लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने वाले ईमेल खातों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को कम करना है। सरकारी ईमेल खातों का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों को निर्धारित अंतराल पर लॉगिन करना होगा। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी ईमेल आईडी सक्रिय रखने के लिए इस नियम का पालन करना आवश्यक होगा।

सरकार प्रत्येक मेलबॉक्स आधारित ईमेल आईडी के रखरखाव के लिए प्रति यूजर सालाना 2,000 रुपये का सेवा शुल्क देगी। इस बदलाव के बावजूद सरकारी ईमेल पतों के आधिकारिक डोमेन में कोई परिवर्तन नहीं होगा। यानी कर्मचारियों की ईमेल आईडी के अंत में इस्तेमाल होने वाला सरकारी डोमेन पहले की तरह ही बना रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से ईमेल सेवा के बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर संचालन में किया जाएगा। पहले जिन ईमेल सेवाओं का संचालन गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से होता था, उनकी जगह अब जोहो के क्लाउड प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इससे मौजूदा ईमेल पहचान को बनाए रखते हुए तकनीकी व्यवस्था में बदलाव किया जा सकेगा।

जोहो भारत की एक निजी आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनी है, जो विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था में सरकारी डेटा को देश के भीतर सुरक्षित रखने और डिजिटल संचार की सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया गया है। नई प्रणाली में एनआईसी की रणनीतिक भूमिका के साथ साइबर सुरक्षा मानकों, सुरक्षा ऑडिट और जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर जैसे प्रावधानों के पालन की बात कही गई है। हालांकि, पुराने ईमेल खातों और डेटा को नई व्यवस्था में स्थानांतरित करने तथा सभी विभागों में इसे पूरी तरह लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया के बारे में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। नए नियमों के तहत ईमेल प्लेटफॉर्म का नियमित उपयोग, खातों की सक्रियता और सरकारी संचार की सुरक्षा प्रमुख बिंदु होंगे।

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