July 20, 2026

डंपिंग यार्ड नहीं तो कचरा कहां जाए? विदिशा में नगर पालिका और रहवासियों के बीच बढ़ा विवाद

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विदिशा । विदिशा शहर में कचरा निस्तारण की समस्या अब गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। स्थायी डंपिंग यार्ड नहीं होने के कारण नगर पालिका के सामने रोजाना शहर से निकलने वाले कचरे के निपटान की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि जहां भी कचरा डंप करने की कोशिश की जाती है, वहां स्थानीय लोगों का विरोध शुरू हो जाता है। रविवार को भी हर्ष विहार कॉलोनी में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब रहवासियों ने कचरा लेकर पहुंचे नगर पालिका के वाहनों को रोक दिया और इलाके में कचरा डालने का विरोध किया।

रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी के पास कचरा डंप होने से पूरे क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है। मक्खियों और मच्छरों की संख्या बढ़ने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि बदबू के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है और बच्चे, बुजुर्ग तथा मवेशी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि घरों में भोजन करना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा एफआईआर कराने की धमकी दी जा रही है।

दरअसल, जिला प्रशासन ने पहले सोठिया गांव के पास डंपिंग यार्ड के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते वहां कचरा डालने की व्यवस्था बंद करनी पड़ी। इसके बाद नगर पालिका ने जतरापुरा और मिर्जापुर की खंतियों का विकल्प चुना, लेकिन लगातार बारिश के कारण वहां तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया। नतीजतन शहर से कचरा उठाने की व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी और कचरे से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा डंपर नगर पालिका परिसर में ही खड़े रहने लगे।

इसके बाद नगर पालिका ने सुआखेड़ी, गेहूंखेड़ी और फिर डाबर रोड स्थित एक खंती में कचरा डालने का प्रयास किया, लेकिन हर स्थान पर ग्रामीणों और स्थानीय रहवासियों ने विरोध दर्ज कराया। इससे स्पष्ट हो गया कि शहर में कचरा निस्तारण की समस्या अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंता का विषय भी बन गई है।

नगर पालिका का कहना है कि डाबर रोड स्थित खंती के मालिक बंटी रघुवंशी की सहमति से वहां कचरा डाला जा रहा है। कर्मचारियों के अनुसार खंती में कचरा डालने के बाद उसे हाइड्रा मशीन से दबाकर ऊपर मिट्टी की परत डाली जा रही है, ताकि दुर्गंध और प्रदूषण न फैले। उनका दावा है कि कचरा खुले मैदान में नहीं फेंका जा रहा, बल्कि केवल खंती को भरने का काम किया जा रहा है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने कचरा वाहनों को वहां तक पहुंचने नहीं दिया।

खंती के मालिक बंटी रघुवंशी का कहना है कि बरसात के दौरान उनकी करीब एक बीघा की खंती पानी से भर जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी कारण उन्होंने खंती भरवाने की अनुमति दी है। वहीं नगर पालिका का सवाल है कि जब हर स्थान पर विरोध हो रहा है, तो शहर से रोज निकलने वाले कचरे का निस्तारण आखिर कहां किया जाए। अब यह मामला केवल सफाई व्यवस्था का नहीं, बल्कि शहर के लिए स्थायी डंपिंग यार्ड विकसित करने की तत्काल आवश्यकता का संकेत बन गया है।

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विदिशा, कचरा संकट, डंपिंग यार्ड, नगर पालिका, स्वच्छता, मध्य प्रदेश, हर्ष विहार, पर्यावरण

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