November 2, 2026

सिंगरौली में वेतन कटौती के खिलाफ उतरे 66 मजदूरों पर बवाल, पुलिस पर लाठीचार्ज और मारपीट के आरोप, वीडियो वायरल

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मध्य प्रदेश । के सिंगरौली जिले में वेतन कटौती के विरोध में प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों और पुलिस के बीच विवाद का मामला सामने आया है। सरई थाना क्षेत्र के खनुआ नवा मुख्य तिराहे पर हुए इस घटनाक्रम के बाद पुलिस पर मजदूरों के साथ मारपीट और लाठीचार्ज करने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना से जुड़े कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे मजदूरों के साथ पुलिस ने सख्ती बरती।

जानकारी के अनुसार, एपीएमडीसी के अंतर्गत काम करने वाली परफेक्ट सिक्योरिटी कंपनी के 66 श्रमिक वेतन में कटौती से नाराज थे। मजदूरों का कहना है कि नई कंपनी के आने के बाद उनका वेतन अचानक कम कर दिया गया। इस बदलाव से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई और परिवार का खर्च चलाने को लेकर परेशानी बढ़ गई। इसी समस्या को लेकर श्रमिकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

अपनी मांगों को लेकर सभी 66 श्रमिक सरई-गजराबहरा मार्ग पर एकत्र हुए और काम बंद कर चक्काजाम कर दिया। बताया गया कि यह प्रदर्शन सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ और रात एक बजे तक जारी रहा। लंबे समय तक सड़क पर आवागमन बाधित रहने के कारण स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। चक्काजाम की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा और श्रमिकों से सड़क खाली कराने का प्रयास किया।

इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी मजदूरों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। श्रमिकों का आरोप है कि जाम खुलवाने की कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और लाठियां चलाईं। घटना के कुछ कथित वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें पुलिस और श्रमिकों के बीच हुई झड़प से जुड़े दृश्य दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इस मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब श्रमिकों ने स्थानीय राजनीतिक नेताओं की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए। मजदूरों का दावा है कि भाजपा लंघाडोल मंडल अध्यक्ष केडी वैश्य और सरई मंडल अध्यक्ष रामधनी जायसवाल पुलिस के साथ थाने से घटनास्थल पर पहुंचे थे। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। हालांकि, इन नेताओं पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

विवाद के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है। वायरल वीडियो को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है और पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए जा रहे हैं। श्रमिकों की मुख्य शिकायत वेतन में कटौती को लेकर है। उनका कहना है कि कंपनी बदलने के बाद उनकी कमाई कम कर दी गई, जबकि वे पहले की तरह काम कर रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने सामूहिक रूप से काम बंद कर विरोध जताया था।

फिलहाल इस पूरे मामले में श्रमिकों के आरोप, वायरल वीडियो और स्थानीय नेताओं को लेकर किए गए दावों की जांच महत्वपूर्ण है। पुलिस की ओर से कार्रवाई के संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक पक्ष इस खबर में सामने नहीं आया है। ऐसे में घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चक्काजाम के दौरान विवाद किस तरह बढ़ा और मौके पर क्या कार्रवाई की गई। वेतन कटौती से शुरू हुआ यह मामला अब पुलिस कार्रवाई और श्रमिकों के अधिकारों से जुड़े सवालों के कारण चर्चा में है।

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