उज्जैन में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का पहला साइंस सेंटर: एक महीने तक फ्री एंट्री, विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया से रूबरू हो रहे बच्चे
उज्जैन की समृद्ध खगोलीय परंपरा को ध्यान में रखते हुए साइंस सेंटर में एक अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी गैलरी विकसित की गई है। इस गैलरी में ग्रहों, तारों, आकाशगंगाओं, ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जानकारियों को आधुनिक डिजिटल तकनीक और आकर्षक मॉडलों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यहां आने वाले लोग न केवल अंतरिक्ष के रहस्यों को समझ रहे हैं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक विरासत और तकनीकी उपलब्धियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
साइंस सेंटर की सबसे खास विशेषताओं में से एक इसकी साइंस फन गैलरी है। यहां लगाए गए इंटरएक्टिव मॉडल बच्चों को खेल-खेल में विज्ञान के सिद्धांत समझने का अवसर देते हैं। गुरुत्वाकर्षण, ऊर्जा, गति, प्रकाश, ध्वनि और संतुलन जैसे विषयों को प्रयोगात्मक तरीके से समझाया गया है। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और रुचि बढ़ रही है।
सेंटर परिसर में विकसित साइंस पार्क भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। खुले वातावरण में स्थापित वैज्ञानिक उपकरण और मॉडल बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने का अवसर देते हैं। यहां छात्र किताबों में पढ़े गए सिद्धांतों को वास्तविक रूप में देखकर समझ सकते हैं, जिससे उनकी अवधारणाएं और अधिक मजबूत होती हैं।
साइंस सेंटर का आधुनिक प्लेनेटेरियम भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। अत्याधुनिक 3D-4K तकनीक से लैस यह प्लेनेटेरियम दर्शकों को अंतरिक्ष की रोमांचक यात्रा पर ले जाता है। यहां प्रदर्शित होने वाली फिल्में जैसे Voyager: The Never Ending Journey और Dawn of the Space Age अंतरिक्ष अनुसंधान, ग्रहों की दुनिया और मानव अंतरिक्ष अभियानों की रोचक जानकारी प्रदान करती हैं।
साइंस सेंटर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। एक महीने की निशुल्क अवधि के बाद भी यहां आने वाले लोगों के लिए प्रवेश शुल्क किफायती रखा गया है। प्लेनेटेरियम शो के लिए सामान्य नागरिकों से 50 रुपए शुल्क लिया जाएगा, जबकि विद्यार्थियों को रियायती दरों पर सुविधा उपलब्ध होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साइंस सेंटर प्रदेश में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आने वाले समय में यह केंद्र विज्ञान शिक्षा, शोध और जागरूकता का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
