March 12, 2026

उज्जैन: चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर को फंसाने की 'खूनी' साजिश साध्वी मंदाकिनी और साथी पर FIR, बनारस की महिला ने खोली पोल

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उज्जैन। उज्जैन के प्रसिद्ध चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज के खिलाफ रची गई एक खौफनाक साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस साजिश की सूत्रधार कोई और नहीं, बल्कि अखाड़े से निष्कासित साध्वी मंदाकिनी पुरी और उसका साथी घनश्याम पटेल हैं। आरोपियों ने महाराज को ‘हनीट्रैप’ में फंसाकर करोड़ों की वसूली और मंदिर पर कब्जे का प्लान बनाया था, जिसके लिए बाकायदा बनारस से एक महिला को ‘हायर’ किया गया था।

साजिश: 50 हजार का लालच और ‘अश्लील वीडियो’ का डर
महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल के अनुसार, साजिश को अंजाम देने के लिए घनश्याम पटेल ने बनारस की एक महिला को 50 हजार रुपये का लालच दिया।महिला को महामंडलेश्वर पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाने के लिए उज्जैन बुलाया गया।जब महिला ने मना किया, तो घनश्याम ने उसके अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी और जबरन उसे उज्जैन आने के लिए बस का टिकट भेजा।

खुलासा: रंगपंचमी के दिन दत्त अखाड़ा परिसर में जब घनश्याम महिला का ‘झूठा बयान’ रिकॉर्ड कर रहा था, तभी संतों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

महामंडलेश्वर का पक्ष: “मंदिर पर कब्जे की है लड़ाई”
महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने इसे अपनी छवि खराब करने और चारधाम मंदिर पर कब्जा करने की सोची-समझी साजिश बताया है। वहीं, एक अन्य महामंडलेश्वर नर्मदाशंकर ने भी मंदाकिनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उसने ‘आचार्य महामंडलेश्वर’ बनाने के नाम पर उनसे 8 लाख 90 हजार रुपये की ठगी की है।

मंदाकिनी पुरी: रसोइए से ‘महामंडलेश्वर’ और फिर जेल तक का सफर
जांच में साध्वी मंदाकिनी का एक काला अतीत सामने आया है:

झूठ की बुनियाद: कभी संतों के लिए खाना बनाने वाली ममता जोशी (मंदाकिनी) ने खुद को अविवाहित और करोड़ों की संपत्ति का मालिक बताकर 2016 के सिंहस्थ में महामंडलेश्वर की पदवी हासिल की थी।

आपराधिक रिकॉर्ड: धोखाधड़ी और उगाही के आरोपों के बाद अखाड़े ने उसे निष्कासित कर दिया था। उस पर जयपुर के एक व्यापारी से हर्बल प्रोडक्ट के नाम पर लाखों की ठगी का भी आरोप है।

सुसाइड ड्रामा: पदवी छिनने के बाद उसने कीटनाशक पीकर जान देने की कोशिश भी की थी, ताकि सहानुभूति बटोर सके।

अखाड़ा परिषद का रुख: “संतों को बदनाम करने का ट्रेंड”
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने इस घटना पर कड़ा रोष जताया है। उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ को देखते हुए संतों की आस्था पर चोट पहुँचाने के लिए ऐसे गिरोह सक्रिय हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर पुलिस इस पूरे नेटवर्क को चिह्नित कर रही है।

निष्कर्ष
“यह मामला केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि धर्म की आड़ में चल रहे ‘कॉरपोरेट स्टाइल’ अपराध का उदाहरण है। जहाँ एक तरफ संतों की गरिमा दांव पर थी, वहीं पुलिस और सतर्क साधुओं ने समय रहते इस ‘हनीट्रैप’ का भंडाफोड़ कर एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया।”

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