October 16, 2026

भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में जमानत पर टिकी नजरें, CBI के नए आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

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भोपाल । भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की चार्जशीट में आरोपों में बदलाव के बाद जमानत याचिका पर नए कानूनी आधारों के साथ विचार किया जाएगा। पहले मामले में दहेज मृत्यु से संबंधित धारा लगाई गई थी लेकिन जांच के बाद आरोपपत्र में इसे हटाकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप शामिल किया गया है। ऐसे में अब अदालत बदली हुई कानूनी स्थिति और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखकर जमानत आवेदन पर सुनवाई करेगी।
इससे पहले जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने गिरिबाला सिंह को जमानत आवेदन में संशोधन करने की अनुमति दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान उनकी ओर से आवेदन में दहेज मृत्यु से संबंधित आरोप को हटाने और नए आरोप के अनुरूप जरूरी बदलाव करने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने इस संशोधन की अनुमति देते हुए कहा था कि बदली हुई परिस्थितियों के आधार पर जमानत पर बहस करने से पहले आवेदन में आवश्यक सुधार किया जाए। CBI की चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु का आरोप हटाकर धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ा गया है।
ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनकी ससुराल में हुई थी। 33 वर्षीय ट्विशा फंदे पर मिली थीं। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। मौत के बाद उनके परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। शुरुआती मामले में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु और क्रूरता सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया था। हालांकि ये आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अदालत द्वारा साबित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
मामले में भोपाल की जिला अदालत ने 15 मई को गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। इस आदेश को मृतका के परिजनों और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। 27 मई को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत का आदेश निरस्त कर दिया था। उस समय अदालत ने केस डायरी में दर्ज बयानों और पोस्टमार्टम से जुड़े तथ्यों सहित कई पहलुओं पर विचार किया था। इसके बाद गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को जांच के दौरान हिरासत में लिया गया।
ट्विशा के परिजनों ने शुरुआती पोस्टमार्टम और जांच को लेकर सवाल उठाए थे और दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर 24 मई को दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने भोपाल में दोबारा पोस्टमार्टम किया। CBI की चार्जशीट में शामिल रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण फंदे से दम घुटना बताया गया और मृत्यु को आत्महत्या माना गया। रिपोर्ट में ऐसी महत्वपूर्ण चोटों के नहीं मिलने की बात भी कही गई जो हमले या संघर्ष का संकेत देती हों।
CBI ने जांच के दौरान डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की भी पड़ताल की। जांच से संबंधित रिपोर्टों में चैट और कॉल रिकॉर्ड सहित ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने आरोपपत्र में कथित मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप रखे हैं। अब गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट बदले हुए आरोपों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करेगा। वहीं ट्विशा शर्मा केस की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई संभावित बताई गई है। जमानत पर अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

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