March 10, 2026

CM कहते हैं कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करते, मुख्य सचिव का कड़ा संदेश, अफसरों में हड़कंप

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भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हलचल मच गई, जब मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर–कमिश्नर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अफसरों को भ्रष्टाचार और लापरवाही पर खुली चेतावनी दे दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कोई यह न समझे कि सब कुछ छिपा रहता है। किसके यहां क्या पक रहा है, इसकी पूरी जानकारी ऊपर तक रहती है।

मुख्य सचिव ने यहां तक कहा कि कई बार मुख्यमंत्री स्वयं कहते हैं कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता, इसलिए सभी अधिकारियों को अपने आचरण को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

इस बयान के बाद प्रशासनिक तंत्र में बेचैनी साफ नजर आई।

PMO और CM की सीधी नजर अफसरों पर
अनुराग जैन ने कहा कि मध्य प्रदेश के हर प्रशासनिक मूवमेंट पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की नजर रहती है। कलेक्टर चाहे नवाचार करें या कहीं भ्रष्टाचार जैसी गतिविधियों में लिप्त हों हर जानकारी ऊपर तक पहुंचती है।
उन्होंने यह भी बताया कि दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी एमपी के अफसरों के काम पर नजर रखते हैं और वहां से भी फीडबैक आता है, जिससे किसी भी अफसर की असलियत सामने आ जाती है।

शिकायतें पहुंच चुकी हैं, समय रहते सुधरें
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि कुछ जिलों को लेकर शिकायतें सीधे उनके और मुख्यमंत्री तक पहुंची हैं।

उन्होंने कलेक्टरों को चेताया कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो कार्रवाई तय है।
उन्होंने कहा कि अफसरों की जिम्मेदारी है कि वे सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हित में काम करें, न कि शिकायतों की वजह बनें।

85 बिंदुओं पर जिलावार समीक्षा
बैठक में 7 और 8 अक्टूबर को हुई कलेक्टर–कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की गई। टॉप थ्री और बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा की गई और कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों को तुरंत सुधार के निर्देश दिए गए।

‘मुस्कान अभियान’ की समीक्षा
महिला सुरक्षा और नाबालिग बालिकाओं की तलाश से जुड़े ‘मुस्कान अभियान’ में अब तक 1900 से ज्यादा बालिकाओं की बरामदगी हुई है।
जन-जागरूकता में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली टॉप पर रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड सबसे कमजोर जिलों में शामिल रहे।

राजस्व विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी
मुख्य सचिव ने Revenue Case Management System (RCMS) में मामलों के निपटारे में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में निराकरण के बाद केस दर्ज किए जा रहे हैं,

जिससे पूरे सिस्टम की समीक्षा ही बेकार हो जाती है।
उन्होंने यह भी संकेत दिए कि एक वरिष्ठ अधिकारी अपनी आईटी कंपनी को काम दिलाने के लिए सिस्टम लागू करने में देरी कर रहा है, जबकि सॉफ्टवेयर तैयार है।

बैठक में मोबाइल चलाने पर कलेक्टर को फटकार
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के मोबाइल इस्तेमाल पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई। साथ ही मनरेगा की धीमी प्रगति पर भी असंतोष जाहिर किया गया।

जहां प्रगति शून्य है, वहां सीईओ के पद रिक्त पाए गए।

कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और अवैध खनन पर सख्ती
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 481 सड़क ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। राहवीर योजना के प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि सड़क हादसों में मौतों को 45–50% तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने अवैध खनिज कारोबार पर सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए भिंड, मुरैना, शहडोल, जबलपुर और नरसिंहपुर में विशेष अभियान चलाने को कहा।

SC–ST मामलों और CM हेल्पलाइन पर अल्टीमेटम
SC–ST मामलों में लापरवाही बरतने वाले जिलों को सख्त चेतावनी दी गई। सीएम हेल्पलाइन में 100 दिन से अधिक लंबित मामलों को एक हफ्ते में निपटाने के निर्देश दिए गए।

साथ ही 15 साल से ज्यादा पुराने सरकारी वाहनों को स्क्रैप करने का आदेश भी जारी हुआ।

राजनीतिक तकरार भी तेज
मुख्य सचिव के कथित बयान को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच, दोषियों को सजा और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग कर दी है। उन्होंने इसे “लेन-देन आधारित शासन” का संकेत बताया है।

मुख्य सचिव की दो टूक चेतावनी ने साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश में अब अफसरों की कार्यशैली, ईमानदारी और जवाबदेही पर सीधी नजर है। सवाल सिर्फ इतना हैक्या यह सख्ती ज़मीन पर भी उतरेगी या फिर यह चेतावनी भी फाइलों में ही दब जाएगी?

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